Gratitude : हर बेहतर इंसान में होती है यह 1 खूबी, जीता है अच्छी जिंदगी

Gratitude : हर बेहतर इंसान में होती है यह 1 खूबी, जीता है अच्छी जिंदगी

पहले समझें क्या है ग्रेटिट्यूट जनरल

ग्रेटीट्यूड जर्नल एक विचार पुस्तिका की तरह काम करता है। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति भगवान, प्रकृति, और खुद से संबंधित चीजों के लिए आभारी होना चाहिए, जिनसे उन्हें खुशी और सुख मिला हो। इसे रोज़ाना डायरी की तरह लिख सकते हैं, या फिर सिर्फ अपने दैनिक जीवन में इसका अमल कर सकते हैं।

अच्छी चीजों पर जाने लगता है ध्यान

यह एक प्रशंसनीय भावना है, जो हमें नकारात्मकता से सकारात्मकता की दिशा में मोड़ने में मदद कर सकती है। इसके माध्यम से हम अपने जीवन में विभिन्न प्रकार की नकारात्मकता को कम करने के लिए उपयोग कर सकते हैं।

हमें यह समझना चाहिए कि वर्तमान समय में हमारे साथ जो भी अच्छा हो रहा है, उस पर ध्यान केंद्रित करके और उसके लिए आभार व्यक्त करके रहना चाहिए।

इसके लिए हमें सबसे पहले अपनी व्यक्तिगत जीवन पर और खुद पर ध्यान देना होता है ताकि हम समझ सकें कि हमारे जीवन में कौन-सी नकारात्मक चीजें हैं। इस प्रक्रिया को मानसिक अध्ययन की भाषा में सेल्फ-इंट्रोस्पेक्शन (Self-introspection) कहा जाता है।

ऐसे करते हैं शुरुआत

जब हम अपनी नकारात्मक चीजों को पहचान लेते हैं, तो हमें उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए हमें अपना ध्यान नकारात्मक चीजों से हटाकर सकारात्मक भावनाओं की ओर मोड़ने की आवश्यकता होती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत हम ग्रेटिट्यूड जर्नल के साथ कर सकते हैं, यानी हर अच्छी चीज के लिए आभार व्यक्त करके।

भावनात्मक बदलाव

जैसे ही हम ग्रेटिट्यूट जर्नल का पालन करना शुरू करते हैं, हमारी स्थितियों में तनाव, चिंता, खिचक और गुस्सा जैसी भावनाएं कम होने लगती हैं।

इससे हमारा मन शांत और खुश रहता है, और हमारा आत्मविश्वास और स्वाभिमान बढ़ जाता है। यह हमें नकारात्मकता के साथ निपटने के कौशल बढ़ाता है और हम पर नकारात्मक विचारों का तेजी से प्रभाव नहीं पड़ता।

बदला लेने की भावना कम होती है

कोपिंग स्किल्स की वृद्धि से व्यक्ति के भावनात्मक संवाद का स्तर बढ़ जाता है, जिससे वह दूसरों के दुख और दर्द को अपने खुद के दुख-तकलीफ के साथ जी सकता है। इसके परिणामस्वरूप, उनमें पूरानी घटनाओं के कारण होने वाली परेशानियों और क्षति का प्रतिशोध लेने की इच्छा कम हो जाती है, और व्यक्ति की प्राकृतिक व्यवहार शांतिपूर्ण और सकारात्मक हो जाता है।

रिश्ते को बैलंस करने में मददगार है ग्रैटिट्यूट जर्नल

आभार व्यक्त करने की प्रवृत्ति से व्यक्ति के आत्म-संघटन कौशल बढ़ते हैं, जिससे उनकी इंपेथी स्तर विकसित होती है और व्यक्ति की समझ क्षमता में सुधार होता है। ये सभी विषय जीवन को बेहतरीन तरीके से जीने और अपने रिश्तों का आनंद लेने में सहायक होते हैं।

इसलिए इसे शुरू करने के लिए हमें किसी अच्छे अवसर का इंतजार नहीं करना चाहिए... बल्कि तुरंत अपने जीवन में इसे प्रारंभ कर लेना चाहिए। इससे कठिनाइयों से निकलना आसान होगा।

घर से करें शुरुआत

ग्रैटिट्यूट जर्नल की शुरुआत के लिए आपको कुछ अलग या नया बनाने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि आप अपने परिवार और सहायकों के काम और समर्थन के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं। अगर आपको शुरुआत में इसमें किसी प्रकार की हिचक या संशय है, तो आपको बोलने से पहले खुद को उनके प्रति कृतज्ञ भावना अर्थात सराहना शुरू करने की कोशिश करनी चाहिए।

इसका परिणामस्वरूप, आपके आत्म-संवाद में सकारात्मकता में वृद्धि होगी। आपका व्यवहार और दृष्टिकोण दोनों ही पहले से बहुत अधिक व्यापक और संभावनाओं से भरपूर होंगे।

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