पुत्र प्रेम से बड़ा और पुत्र शोक से बड़ा कुछ नहीं
सबसे कम बोलचाल पिता-पुत्र में ही होता है।
दोनों एक दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखते हैं।
माहौल कभी भी किसी बात पर खराब होने का डर बना रहता है।
ऐसा होता है जब पुत्र अपनी जवानी पार कर अगले पड़ाव पर चढ़ता है।
पिता अक्सर पुत्र की मां से कहता है जरा उससे कह देना और पुत्र अक्सर अपनी मां से कहता है पापा से पूछ लो ना।
पिता-पुत्र नजदीकी से डरते हैं जबकि डर नजदीकी का नहीं डर है माहौल बिगड़ने का होता है।
किसी पिता ने शायद ही किसी बेटे से कभी कहा हो कि बेटा मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूं जबकि वह प्यार बेइंतहा ही करता है लेकिन पिता कभी पुत्र प्रेम प्रदर्शित नहीं कर सकता।
पुत्र प्रेम से बड़ा और पुत्र शोक से बड़ा कुछ नहीं।
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