इस ऐसे समय में, जब दुनिया कोरोना महामारी के खौफनाक संकट से गुजर रही है, और लोग अपने जीवन की सबसे अधिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, तो दुनिया के धनी और अमीर व्यक्तियों की अंतरिक्ष में यात्रा के शौक में लगना क्या सही है? क्या यह उचित है, जब बीते एक साल में सभी मानव दुखी और चिंतित रहे हैं?
या फिर, दुनिया से बाहर जाने की इस इच्छा को एक तरह का ख्वाब माना जा सकता है, जो मानव सभ्यता के महत्वपूर्ण लक्ष्यों और नए साहसिक कल्पनाओं का प्रतीक है, और आने वाले समय में तरक्की के नए आयाम की ओर एक खुलने वाला दरवाजा हो सकता है।
स्वीकार करें कि 21वीं सदी में, धनवान देशों के धनी व्यक्तियों के लिए अब एक नई प्रकार की मनोरंजन अंतरिक्ष पर्यटन है। यहां तक कि जबकि पूरी दुनिया आज कोविड-19 महामारी से जूझ रही है, लाखों लोगों को जान की बाजी लग गई है, विश्व की 22% आबादी को भूख, कपड़ा, और मकान की घातक कमी का सामना करना पड़ रहा है, और दुनिया भर में दुराग्रह और हिंसा मनमुटाव का सामना कर रही है, मानव की आत्मकेन्द्रित चालचित्र्य और आवश्यकता के परिपेक्ष्य में यह पृथ्वी कुछ क्षणों में उजड़ जाने वाली है। हालांकि, मानव की आकांक्षा और उत्साह अंतरिक्ष के प्रति भी अत्यधिक है, इसलिए अब वे उसे अनुभव कर रहे हैं, जो किसी समय दूर की कुर्सी की बात थी, और जिसे हम पूरानी किस्सों में सुनते थे।
व्यावसायिक अंतरिक्ष उड़ानों का हिसाब-किताब
अमेरिका में, व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्राओं और सूने के ऊपर कुछ लम्बे समय तक बिताने का एक नया और उत्साहजनक शौक अब उभर रहा है। पैसे देकर अंतरिक्ष की कुछ मिनटों की यात्रा का आनंद अब 'दुनिया की सैर' के रोमांच से कई गुना बढ़ गया है। यह वही तरह का उत्साह है, जैसा कि मानव को पहली बार रेलगाड़ी में बैठकर मिला होगा। पिछले 51 सालों में, वैज्ञानिक अद्भुत कारणों और मानव की अद्वितीय इच्छाशक्ति के कारण, अंतरिक्ष यात्री अब दूरस्थ अंतरिक्ष में जाने का आनंद लेते आ रहे हैं।
हजारों सालों से, चंद्रमा को सौंदर्य और आकर्षण का प्रतीक माना गया है, और आधी सदी पहले नील आर्मस्ट्रांग के रूप में मानव का पहला कदम चंद्रमा पर रखा गया था। इसके साथ ही, ब्रह्मांड को साकार रूप से छूने का महान सपना भी आरंभ हुआ था, जिसने अब व्यावसायिक रूप में अपना आयाम पाया है। इसलिए, दुनिया के धनी व्यक्तियों ने अंतरिक्ष पर्यटन कंपनियों की स्थापना की है। इनमें सबसे पहली कंपनी 'वर्जिन गैलेक्टिक' है, जिसके माध्यम से अरबपति व्यवसायमान सर रिचर्ड ब्रैंसन ने अंतरिक्ष में यात्रा का आयोज किया। इस कंपनी के यान वीएसएस यूनिटी में ब्रैंसन के साथ तीन और व्यक्तियों ने अंतरिक्ष यात्रा की।
दूसरी अंतरिक्ष कंपनियों में से एक 'ब्लू ओरिजिन' है, जिसके मालिक जेफ बेजोस हैं, और तीसरी कंपनी 'स्पेस एक्स' है, जिसके मालिक अरबपति एलन मस्क हैं। इन अंतरिक्ष पर्यटन के लिए यह सब कुछ, जैसे की रोमांच, और 'जीरो ग्रेविटी' (गुरुत्वाकर्षण शून्यता) के चंद मिनटों के अनुभव के लिए खर्च किया जाता है।
कई सवाल और रहस्य की दुनिया
यह सवाल उठ सकता है कि अंतरिक्ष की सीमा कहां से शुरू होती है? नासा और फेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनल का मानना है कि अंतरिक्ष 'कार्मान लाइन' से शुरू होता है। कार्मान लाइन एक काल्पनिक रेखा है, जो समुद्र सतह से आकाश में 100 किलोमीटर ऊपर है। इस रेखा को पार करने वाले अंतरिक्ष यात्री को 'एस्ट्रोनॉट' कहा जाता है। यदि हम इसे अंतरिक्ष पर्यटन की दृष्टि से देखें, तो इस प्रतिस्पर्धा में बेजोस और ब्रैंसन दोनों आगे हैं, क्योंकि वीएसएस यूनिटी में बैठे ब्रैंसन ने 86 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुँचा, जबकि बेजोस का यान 106 किलोमीटर तक पहुँचा है।
बोइंग कंपनी की स्टारलाइनर टेस्ट फ्लाइट दोनों को पीछे छोड़ देने की ओर बढ़ रही है। इसकी पर्यटक यान 30 जुलाई को अंतरिक्ष में 400 किलोमीटर तक यात्रा करेगा और यह अंतरिक्ष में 10 से 15 दिनों के लिए बना रहेगा, लेकिन इसमें कोई मानव नहीं होगा। यह वास्तव में कुछ अंतरिक्ष सामग्री की वितरण के लिए जाएगा। बाद में इसकी नियमित अंतरिक्ष यात्राएँ भी शुरू हो सकती हैं।
स्पेस टूरिज्म (अंतरिक्ष पर्यटन) एक प्रकार की यात्रा है जिसमें मानव अंतरिक्ष में जाते हैं, और इसका कोई विज्ञानिक उद्देश्य नहीं होता। इस प्रकार के पर्यटन कई तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि कक्षीय (ओर्बिटल), उपकक्षीय (सब ऑर्बिटल), और चंद्राकाश (ल्यूनर स्पेस) पर्यटन। रूस की रोसकॉस्मोस, अमेरिका की ब्लू ओरिजिन, और वर्जिन गैलेक्टिक कंपनियाँ मुख्य रूप से कक्षीय या उपकक्षीय पर्यटन का आयोजन करती हैं।
इसका मतलब है कि पृथ्वी के 80 से 100 किमी की ऊँचाई पर जाकर पर्यटकों को कुछ समय के लिए वह अद्वितीय गुरुत्वाकर्षण शून्य और वातावरण-रहित वातावरण का अनुभव कराया जाता है। हालांकि इस समय की यात्राएँ 'अंतरिक्ष को सीने की चूमने' के रूप में हो रही हैं।
कुछ अद्वितीय रूप से दुनिया अंतरिक्ष पर्यटन में एक नया बाजार देख रही है, जो लोगों को धरती पर की जिन्दगी से अलग तरीके की अनुभव कराने का मौका देता है, और यह लोगों में नए और रोमांचक अनुभवों की तलाश के उत्साह के साथ भरा होता है। यह बताया जाता है कि वर्जिन गैलेक्टिक ने अपने यात्रा टिकट को 2 से 2.5 लाख डॉलर प्रति यात्री के हिसाब से बेचा है। कंपनी ने अब तक 600 से अधिक टिकट बेच चुकी है। वहीं, 'ब्लू ओरिजिन' की कीमतों का खुलासा नहीं किया गया है। कुछ और सस्ती स्पेस फ्लाइट्स भी हैं, जैसे कि बलून आकार की कैप्सूल से अंतरिक्ष यात्रा के लिए खर्च सिर्फ एक सवा लाख डॉलर प्रति सीट है। लेकिन इसमें यात्री अंतरिक्ष में बहुत कम समय के लिए रहेगा। इसके लिए भी अगले चार सालों के लिए 300 टिकट बुक हो गए हैं।
'वर्जिन गैलेक्टिक' का दावा है कि वे अगले साल से नियमित रूप से अंतरिक्ष यात्राएँ शुरू करेंगे, जिनमें हर साल 400 यात्राएँ हो सकती हैं। आने वाले सालों में, अंतरिक्ष पर्यटन का वैश्विक बाजार कुछ लगभग 385 अरब रुपये का होने का अनुमान है। इसके बावजूद, दुनिया के पहले अंतरिक्ष पर्यटक के रूप में अमेरिकी डेनिस टीटो हैं, जो 2001 में एक रूसी सोयूज यान में सवार होकर अंतरिक्ष में गए थे। वे वापस आने के बाद अपने अनुभव को 'अद्वितीय' कहा था।
टीटो की इस यात्रा का खर्च करीब 2 करोड़ डॉलर था। अमेरिकी बिलियनेयर और टेस्ला कंपनी के मालिक एलन मस्क ने चाँद और मंगल ग्रह पर पर्यटन की भी घोषणा की है, और उनकी कंपनी 'स्पेस एक्स' इस पर काम कर रही है। इस पर्यटन की उम्मीद है कि फाल्कन हैवी रॉकेट का उपयोग करके 2024 तक होगा। अगर आप चाँद पर जाना चाहते हैं तो प्रति पैसेंजर के लिए यात्रा की कीमत करीब 1 अरब डॉलर (करीब 75 अरब रुपये) हो सकती है। उस अपोलो 11 मिशन की जब नील आर्मस्ट्रांग ने पहली बार चाँद पर कदम रखा था, तो उसका खर्च करीब 25.4 अरब डॉलर (आज के हिसाब से करीब 135 अरब डॉलर) था।
माना जा रहा है कि समय के साथ अंतरिक्ष यात्राएँ और सस्ती हो सकती हैं। हालांकि यह कब होगा कि एक साइकिल या स्कूटर की तरह आसमान में यात्रा करना मुमकिन होगा, इसका कोई निश्चित समयफ्रेम नहीं है। इन अंतरिक्ष यात्राओं की तैयारी बहुत पहले से की जाती है, क्योंकि ये बहुत ही रोमांचक होती हैं और उच्च प्रौद्योगिकी और जोखिम से भरी होती हैं। इसके लिए विशेष लाइसेंस की आवश्यकता होती है और अंतरिक्ष यात्री को प्रशिक्षण भी लेना पड़ता है। अमेरिका और कुछ अन्य देशों ने अंतरिक्ष पर्यटन के लिए कानून भी पास किए हैं।
अंतरिक्ष पर्यटन की अनुगूंज साहित्य में
इस अंतरिक्ष पर्यटन के साथ ही साहित्य के क्षेत्र में भी एक नया परिवर्तन आया है। हालांकि अब तक कोई साहित्यकार अंतरिक्ष में नहीं गया है, लेकिन आने वाले बदलते समय में अंतरिक्ष में लिखी जाने वाली कविताओं को 'स्पेस पोएट्री' (अंतरिक्ष कविता) कहा जा रहा है। एक सवाल यह भी उठ सकता है कि पृथ्वी पर लिखी गई कविता और अंतरिक्ष में लिखी जाने वाली कविता में क्या अंतर हो सकता है? रचयिता तो मानव ही होगा। दोनों में एक अनुभवगत मूल फर्क होगा। पृथ्वी पर लिखी जाने वाली कविता गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से रची जाती है, जबकि अंतरिक्ष में भारहीनता और गुरुत्वाकर्षणशून्य आवस्था में कविता रची जाएगी।
शारीरिक, मानसिक और संवेदना के स्तर पर इन दोनों के बीच कितना और कैसा फर्क होगा, यह अंतरिक्ष कविता की प्रकटि के बाद ही पता चलेगा। उसकी भाषा, उसकी रचना कैसी होगी, यह अभी केवल कल्पना में ही बताया जा सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'विजुअल आर्ट' के और करीब हो सकता है। जब अंतरिक्ष पर्यटन का प्रचलन बढ़ेगा, तो साहित्य की एक नई प्रारूप के लिए भी जगह बनेगी। यह भी कहा जा रहा है कि अंतरिक्ष पर्यटन एक नई वैश्विक संस्कृति की शुरुआत करेगा, जिसके बारे में हम अब तक केवल सोच सकते हैं।
अंतरिक्ष पर्यटन के साथ कई नैतिक और सुरक्षा संबंधी सवाल भी उत्पन्न हो रहे हैं। पहला सवाल यह है कि क्या मानव अंतरिक्ष में विचरण करना प्राकृतिक संरचना में हस्तक्षेप है, और क्या हमने पहले से ही पृथ्वी को नुकसान पहुंचाया है, तो क्या अब हमारा इरादा है कि हम अंतरिक्ष में भी वैसा ही करें? हालांकि सकारात्मक सोच वाले इसे एक दूसरे दृष्टिकोण से देखते हैं। उनका विचार है कि अंतरिक्ष पर्यटन मानव सभ्यता के विकास और प्रगति के नए द्वार खोलेगा।
भविष्य की मानव आकांक्षाओं में शामिल हैं - चाँद पर यात्रा (जो कवि कल्पना में एक रूप में हो सकती है, लेकिन हकीकत में अलग है), चाँद पर मानव बस्तियों की स्थापना, बस्तियों की निर्माण के लिए जगहों का कब्जा करना, चाँद की मिट्टी को छूने और चाँद की सुगंध को महसूस करने की इच्छा, चाँद के अंधेरे हिस्से की खोज, जिसके बारे में हमें अधिक जानकारी नहीं है, और विशाल उल्का पिण्डों से धातु खनन की संभावनाएं जांचना, साथ ही अंतरिक्ष यात्रीगण के साथ भोजन करना, आदि।
हम कह सकते हैं कि अंतरिक्ष यात्रा के लिए खर्च करने के बजाय, ये धनी व्यक्तियों को दुनिया की गरीबी को कम करने और शांति स्थापित करने में मदद करने के लिए कुछ कर सकते हैं। इस तरह की अनुभव से गुजरने वाले आम इंसान के लिए जीवन कैसे हो सकता है, जब वह गुरुत्वाकर्षण के बिना होता है? क्या धरती की खामोश और खोखली तरह की वातावरण में उसकी जिन्दगी बेहतर हो सकती है? ये सभी सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन इस वक्त, ब्रैंसन, बेजोस, और मस्क जैसे धनी व्यक्तियों को हम मानव मन की गहरी आकांक्षा का साकार रूप में देख सकते हैं। यह शगल भी केवल मानव समर्थन और अद्वितीय रचनात्मकता के लिए एक प्लेग्राउंड है, इसमें उनकी अदम्य इच्छाशक्ति और अनगिनत सर्ववर्गीयता का एक भाग है।
इस वर्ष, यह भी एक सवाल उठता है कि क्या भारतवासी इस अंतरिक्ष टूरिज्म की दुकान में हैं? चाहे वैसा हो या न हो, जुलाई महीना मानव सभ्यता के कैलेंडर में अंतरिक्ष माह के तौर पर दर्ज हो गया है, क्योंकि 1969 में 20 जुलाई को पहली बार मानव चांद पर कदम रखे थे और 52 साल बाद, अब दूसरे लोग भी 'टूरिस्ट स्पॉट' के रूप में अंतरिक्ष की सैर करने लगे हैं, और यह सफर अब तो बस शुरू हुआ है।
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