Self-Healing Materials : आने वाली है जबरदस्त टेक्नोलॉजी जो टूटे हुए हिस्सों को फिर से जोड़ सकती है |

Self-Healing Materials : आने वाली है जबरदस्त टेक्नोलॉजी जो टूटे हुए हिस्सों को फिर से जोड़ सकती है |

स्व-उपचार रोबोट Self Healing Robots

जानकारी के लिए बताना चाहेंगे कि सेल्फ हीलिंग क्रिस्टलीन मटेरियल पहली ऐसी तकनीक नहीं है जिस पर रिसर्च चल रही हो, कुछ समय पहले अमेरिकी केमिकल सोसाइटी के शोधकर्ताओं ने ऐसे तैराकी रोबोट विकसित किए थे जो चुंबकीय रूप से खुद को ठीक कर सकते हैं। सिंगापुर के NUS टीम ने एक स्मार्ट फोम मटेरियल बनाया था, जो रोबोट को वस्तुओं को समझने और खुद की मरम्मत करने में मदद करता था।

सेल्फ हीलिंग क्रिस्टलीन मटेरियल क्या है ? ( What is Self-Healing Crystalline Material)

जैसा कि हमने पहले बताया, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (IISER) कोलकाता के शोधकर्ताओं की टीम ने एक प्रकार का पीजोइलेक्ट्रिक मॉलिक्यूलर क्रिस्टल खोजा है, जो स्वतः ही अपने आप को ठीक कर सकता है। इसके अलावा, उन्होंने साइंस जर्नल में अपने पेपर में इस क्रिस्टल के साथ अपने काम का विवरण किया है।

ये वर्षों में स्व-उपचार सामग्री के शोध के लिए महत्वपूर्ण है। इस तरह के प्रयासों से कुछ अच्छे परिणाम मिले हैं, जैसे कि पॉलिमर, जैल और अन्य विभिन्न मटेरियल्स के विकास की कहानी। ये सफलताएं आम तौर पर नरम (soft) मटेरियल्स पर हुई हैं। इस नए शोध में, शोधकर्ताओं को एक बड़ी चुनौती थी - वे एक ऐसे ठोस और मजबूत मटेरियल की खोज करना चाहते थे जो स्वतः हीलिंग कर सके, अर्थात जब इसमें कोई खराबी होती है, तो वह खुद से ठीक हो जाए। वे एक ढोस पदार्थ की खोज करने में सफल हुए जिसे नियमित रूप से व्यवस्थित अणुओं से बनाया गया था और जब अलग हो जाता था, तो ठीक भी हो जाता था।

सेल्फ हीलिंग क्रिस्टलीन मटेरियल कैसे काम करता है ? ( How does work Self-Healing Crystalline Material)

एक पत्रिका एएएएस में प्रकाशित हुए शोध में बताया गया है कि पीजोइलेक्ट्रिकिटी, मानव शरीर में हड्डी और कोलेजन प्रोटीन जैसे यांत्रिक रूप से घायल प्राकृतिक बायोमैटिरियल्स में स्व-उपचार को आरंभ करती है। हमारे प्राकृतिक तरीके से यह self-healing प्रक्रिया है, जिससे इस शोध का प्रेरणा मिला। विशेष रूप से डिजाइन किए गए पीजोइलेक्ट्रिक आणविक क्रिस्टल में आणविक व्यवस्था के कारण, दो सतहों के बीच एक मजबूत आकर्षक बल उत्पन्न होता है। जब भी इसमें कोई फ्रैक्चर होता है, तो बिना किसी बाहरी एजेंट के, यह टुकड़े फिर से जुड़ जाते हैं। जब किसी यांत्रिक प्रभाव को प्राप्त किया जाता है, तो टूटे हुए टुकड़ों के बीच विद्युत आवेश उत्पन्न होता है, जो सटीक स्व-मरम्मत की प्रक्रिया का कारण बनता है।

इस शोध में, पीजोइलेक्ट्रिक आणविक क्रिस्टल का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने सोचा कि ऐसे क्रिस्टल में मौजूद गुणों को उनकी आकर्षक शक्तियों के कारण स्वयं को ठीक करने के लिए उन्हें प्रयोग में लिया जा सकता है। परीक्षण और असफलताओं के कई प्रयासों के बाद, शोधकर्ताओं ने बिपिराज़ोल कार्बनिक क्रिस्टल का खोजाव किया। इसके बाद, उन्होंने इसे छोटे (2 मिमी लंबे और 0.2 मिमी चौड़े) सुई के आकार में विकसित किया। उन्होंने परीक्षण क्रिस्टल पर पर्याप्त दबाव डालकर उन्हें तोड़ा, और फिर देखा कि वे टूटने के बाद भी फिर से दरार के गैप को भर दिया और self-heal हो गए। इसके आगे, ध्रुवीकरण माइक्रोस्कोप प्रणाली के साथ क्रिस्टल के परीक्षण से पता चला कि सामग्री वास्तव में ठीक हो गई थी जिसमें टूटी हुई जगह पर दरार का कोई सबूत नहीं था।

सेल्फ हीलिंग क्रिस्टलीन मटेरियल का उपयोग ? ( Use of Self-Healing Crystalline Material)

आईआईएसईआर के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर चिल्ला मल्ला रेड्डी के अनुसार, भारत में विकसित किए गए सेल्फ हीलिंग मटेरियल दूसरे सेल्फ हीलिंग मटेरियल्स की तुलना में 10 गुना मजबूत हैं और इसमें एक सुव्यवस्थित आंतरिक क्रिस्टलीय संरचना होती है, जिसके कारण इसका उपयोग अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिकल में किया जा सकता है।

1. माइक्रो-चिप्स, मैकेनिकल सेंसर, माइक्रो-रोबोटिक्स और एक्चुएटर्स में।

2. स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी की स्क्रीन और स्क्रीन गार्ड में।

3. सेल्फ हीलिंग ब्रिज और बिल्डिंग में।

4. अंतरिक्ष यान जो की लैंडिंग के बाद क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, के किसी छोटे हिस्से की ऑटो-मेंटीनेन्स में।

5. कम गति की टक्करों के बाद वापस आकार में आने वाली कारों में।

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