संचार प्रणाली में मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन क्या होता है?
मॉड्यूलेशन क्या होता है?
मॉड्यूलेशन का शाब्दिक अर्थ होता है रेगुलेट करना (to regulate) या ठीक करना (to set right) या एडजेस्ट करना (to adjest) इत्यादि।
संचार (communication) में मॉड्यूलेशन का अर्थ होता है — एक उच्च आवृत्ति तरंग (high frequency wave) की विशेषित विशेषताओं, जैसे कि आयाम, आवृत्ति या फील्ड, को निम्न आवृत्ति के सूचना सिग्नल (low frequency information signal) के साथ बदलने की प्रक्रिया।
संचार प्रणाली में उच्च आवृत्ति तरंग को कैरियर तरंग (carrier frequency) और निम्न आवृत्ति के सूचना सिग्नल को मॉड्यूलेटिंग सिग्नल (modulating signal) कहा जाता है। कैरियर तरंग का ऑडियो सिग्नल (मॉड्यूलेटिंग सिग्नल) द्वारा मॉड्यूलेशन होने पर अर्थात मॉड्यूलेशन के पश्चात जो तरंग प्राप्त होती है उसे मॉड्यूलेटेड तरंग (modulated wave) कहते हैं। इस मॉड्यूलेटेड तरंग को ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। मॉड्यूलेशन क्रिया की सहायता से बेसबैंड आवृत्तियो को उच्च आवृत्ति रेंज में शिफ्ट कर दिया जाता है जिससे की उनका ट्रांसमिशन (transmission) आसानी से हो सके।
उस मूल सिग्नल को जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाना है, उसे बेसबैंड सिग्नल (baseband signal), मैसेज सिग्नल (message signal) या मॉड्यूलेटिंग सिग्नल (modulating signal) कहा जाता है।
"मॉड्यूलेशन एक प्रक्रिया है जिसका उपयोग उच्च आवृत्ति के कैरियर तरंग के अभिलक्षण जैसे आयाम, आवृत्ति या कला को निम्न आवृत्ति की मॉड्यूलेट तरंग में तात्क्षणिक मान के आधार पर बदलने के लिए किया जाता है।"
इसका अर्थ है कि "उच्च आवृत्ति के कैरियर तरंग पर, ऑडियो आवृत्ति के अध्यारोपण की प्रक्रिया को मॉड्यूलेशन कहा जाता है।"
मॉड्यूलेशन की प्रक्रिया द्वारा बेसबैंड आवृत्तियों को उच्च आवृत्ति सीमा में स्थानांतरित किया जाता है, जिससे सिग्नल के प्रेषण का योग्य तरीके से संभावना होती है। इससे हम जिन सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना चाहते हैं, उन सूचनाओं का अच्छे से प्रेषण संभव होता है।
डिमॉड्यूलेशन क्या होता है?
मॉड्यूलेशन की विपरीत प्रक्रिया को डिमॉड्यूलेशन कहा जाता है। "डिमॉड्यूलेशन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा मॉड्यूलेटेड तरंग (मैसेज सिग्नल या बेसबैंड सिग्नल) से मूल मॉड्यूलेटिंग तरंग को पुनः प्राप्त किया जाता है।" मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन की प्रक्रिया संचार प्रणाली में आवश्यक है। बिना इन प्रक्रियाओं के, संचार संभव नहीं होता। सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने से पहले, मॉड्यूलेशन की प्रक्रिया का उपयोग होता है और उसके बाद डिमॉड्यूलेशन की प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इससे हम मूल सूचना सिग्नल को प्राप्त कर पाते हैं। मॉड्यूलेटेड तरंग द्वारा कैरियर को मॉडुलेट करने के बाद, यह मॉड्यूलेटेड तरंग ट्रांसमिट की जाती है और रिसीवर इसे प्राप्त करता है। फिर रिसीवर मॉड्यूलेटेड तरंग को डिमॉड्यूलेशन करता है। इससे हम मूल सूचना प्राप्त कर सकते हैं।
मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
सूचना सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने से पहले, मॉड्यूलेशन की प्रक्रिया का उपयोग होता है और फिर सूचना सिग्नल एक उच्च आवृत्ति कैरियर सिग्नल को मॉड्यूलेट करता है, जिसके बाद मॉड्यूलेटेड तरंग को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। रिसीवर पर मॉड्यूलेटेड सिग्नल का डिमॉड्यूलेशन करके पुनः मूल सूचना प्राप्त की जाती है। मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है।
- उच्च आवृत्तियों पर सिग्नल के प्रेषण में सस्तापन और विश्वसनीयता की दृष्टि से फायदा होता है— निम्न आवृत्ति के सिग्नल दूरी को अधिक से अधिक परिभाषित नहीं कर सकते हैं और इसके प्रेषण में उच्च आवृत्ति सिग्नलों की तुलना में अधिक पौरुष की आवश्यकता होती है। अंत में, बेसबैंड सिग्नल को प्रेषित करने से पहले उसे उच्च आवृत्ति सीमा पर ले जाया जाता है। इस प्रक्रिया को मॉड्यूलेशन कहा जाता है।
- यदि सूचना सिग्नल को बिना मॉड्यूलेशन किए प्रसारित किया जाता है, तो सूचना को प्राप्त करने के लिए एक अत्यधिक लंबी एंटीना की आवश्यकता होगी— एगर किसी एंटीना की ऊचाई प्रयुक्त सिग्नल की तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) के एक चौथाई से अधिक होती है, तब ही वह सिग्नल एंटीना द्वारा ठीक प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है। यदि एंटीना की ऊचाई प्रयुक्त सिग्नल की तरंगदैर्ध्य की एक चौथाई से कम हो, तो एंटीना सिग्नल को सही ढंग से प्राप्त नहीं कर सकेगा। आखिरकार, यदि सिग्नल को बिना मॉड्यूलेशन किए भेजा जाता है, तो उसे प्राप्त करने के लिए एक बहुत ऊँची एंटीना की आवश्यकता होगी, जो संभावना से बाहर है।
- मॉड्यूलेशन करने से ही आवृत्ति डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग (Frequency Division Multiplexing) संभव होता है— ऑडियो आवृत्ति में एक निश्चित सीमा (रेंज) होती है। इसलिए, यदि सभी स्टेशन इसी आवृत्ति सीमा पर प्रसारण करते हैं, तो सभी स्टेशन के सिग्नल आपस में मिलकर मिश्रित हो जाते हैं, और इन्हें रिसीवर पर अलग करना मुश्किल हो जाता है। मॉड्यूलेशन द्वारा सूचना सिग्नल की आवृत्तियाँ उच्च आवृत्ति रेंज में स्थानांतरित होती हैं। इसलिए, प्रत्येक स्टेशन की कैरियर आवृत्ति को अलग-अलग रखकर प्रत्येक स्टेशन के सिग्नल को अलग-अलग आवृत्ति रेंज में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इस तकनीक को फ्रीक्वेंसी डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग कहा जाता है। इसके अंतर्गत, प्रत्येक स्टेशन को एक आवृत्ति बैंड निर्धारित की जाती है, और उस स्टेशन का रिसीवर उसी आवृत्ति बैंड को रिसीव करता है, जिसके लिए उसका चयन किया गया होता है, इससे मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन की प्रक्रिया से कई स्टेशनों के सिग्नल के मिक्सअप (मिक्स-अप) की संभावना समाप्त होती है
मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन
इस लेख में हमने जाना कि मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन क्या होता है? और मॉड्यूलेशन और डिमॉड्यूलेशन की आवश्यकता क्यों आवश्यक होती है?
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