रामसिंग नामक एक राजा ने सब कुछ पाया था। राज्य में भी कामकाज आराम से चल रहा था। राजा के नैतिक गुणों से भी जनता बहुत खुश थी, और खुश राज्य की आर्थिक व्यवस्था भी अच्छी होती है, इसलिए राज्य का प्रवाह हर क्षेत्र में अच्छा था।
राजा को इतने सुखों के बाद भी कोई बच्चा नहीं था, इसलिए वह दुखी था। इस बात से भी जनता बहुत दुखी थी। वर्षों के बाद, राजा की इच्छा पूरी हुई और उसे एक पुत्र मिला। नगर में कई दिनों तक उत्सव मनाया गया राज महल में नागरिकों को दावत दी गई। राजा की खुशी से जनता भी झूम उठी।
धीरे-धीरे राजकुमार का नाम कृष्णा रखा गया। राजा को पूजा-पाठ और इंतजार के बाद बच्चा हुआ, इसलिए उसे बहुत प्यार से रखा गया, लेकिन बहुत कुछ अच्छा नहीं था। कृष्णा को बहुत लाड़ लगी थी।कृष्णा की हर बात बचपन में दिल को भाती थी, लेकिन जब वे बड़े होते हैं, तो यही बातें बत्तमीजी लगने लगती हैं।कृष्णा बहुत जिद्दी हो गया था, उसके मन में अहंकार आ गया था, वह चाहता था कि लोग उसकी सदा प्रशंसा करें और उसे सराहें। उसकी बात न सुनने पर वह हंस पड़ा। बैचारे सैनिको ने उसे सिर्फ पैर की जुती समझा था। आये दिन जनता पर उसका क्रोध उतरने लगा था। वह भगवान की तरह पूजा जाता देखना चाहता था। उसकी आयु बहुत छोटी थी, लेकिन उसका मान कई गुना बढ़ चुका था।

कृष्णा का यह व्यवहार सभी को बहुत दुखी करता था। राजा हर दिन लज्जित होकर दरबार में कृष्णा की शिकायत करता था। यह एक गंभीर मुद्दा बन गया था |
एक दिन, राजा ने सभी विशिष्ट दरबारियों और मंत्रियों को एकत्र करके अपने दुख की बात बताई, राजकुमार के इस व्यवहार से। राजकुमार इस देश का भविष्य हैं, यदि उनका व्यवहार यही रहा तो राज्य की सुख-शांति कुछ ही दिनों में समाप्त हो जाएगी। दरबारी राजा को सांत्वना देते हुए कहते हैं कि हिम्मत रखना चाहिए वरना जनता निसहाय हो जाएगी। मंत्री ने सुझाव दिया कि राजकुमार को सही मार्गदर्शन और सामान्य जीवन का अनुभव चाहिए। आप उन्हें गुरु राधा के आश्रम में भेज दें, सुना है कि वहाँ जानवर भी इंसान बन जाते हैं। राजा को यह पसंद आया, तो उसने कृष्णा को गुरु के पास भेजा।
अगले दिन, राजा अपने पुत्र के साथ गुरु के घर गए। राजा ने अकेले गुरु राधा से बात की और कृष्णा के बारे में सब कुछ बताया। गुरु ने राजा को बताया कि वे अपने पुत्र को देखकर गर्व महसूस करेंगे। गुरुजी की बात सुनकर राजा को राहत मिली और साहस से अपने पुत्र को आश्रम में छोड़कर राज महल लौट गए।
कृष्णा को अगले दिन सुबह गुरु के विशिष्ट चेले ने भिक्षा मांगी और खाने को कहा, लेकिन कृष्णा ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। चेले ने उसे बताया कि अगर खाना चाहिए तो भोजन मांगना चाहिए, और भोजन का समय शाम तक ही है, अन्यथा भूखा रहना पड़ेगा। कृष्णा ने अपनी अकड़ में चेले की बात नहीं मानी और शाम होने लगी जब उसे खाने को नहीं मिला। दुसरे दिन उसने भोजन की मांग करना शुरू किया। पहले उसे भोजन नहीं मिलता था क्योंकि वह बोलता था, लेकिन गुरुकुल में सभी के साथ बैठने पर उसे आधा पेट भोजन मिलता था। कृष्णा को मीठे बोल का महत्व धीरे-धीरे समझ आने लगा, और करीब एक महीने बाद उसे भरपेट भोजन मिला, जिसके बाद उसके व्यवहार में बहुत बदलाव आया।
ठीक उसी तरह, गुरुकुल के सभी नियमों ने राजकुमार को बहुत बदल दिया, जिसे राधा भी जानते थे। एक दिन राधा ने कृष्णा को सुबह की सैर पर चलने को कहा।दोनों सैर पर निकलते समय बहुत बाते की गईं | कृष्णा को गुरु ने बताया कि वह बहुत बुद्धिमान है और उसके पास बहुत अधिक ऊर्जा है जिसका सही उपयोग करना चाहिए। दोनों चले गए और एक सुंदर बाग में पहुँच गए। जहाँ बहुत से सुंदर फूलों से बाग महक रहा था गुरु ने कृष्णा को बाग से गुलाब के फूल तोड़ने को कहा। कृष्णा ने एक सुंदर गुलाब तोड़ कर अपने गुरु के सामने रख दिया। गुरु ने फिर उसे नीम के पत्ते तोड़कर लाने को कहा। कृष्णा ने उसे भी लाया | अब गुरुजी ने उसे एक गुलाब सूंघने दिया और कहा कि उसे सूंघने के बाद अपनी प्रतिक्रिया बताओ। कृष्णा ने गुलाब सुंघा और गुलाब की काफी प्रशंसा की। फिर गुरु ने कहा कि वह नीम के पत्ते चखकर इसके बारे में बताएगा। जतर ने कतर को पीने का पानी खोजने लगा, जब कृष्णा ने नीम के पत्ते खाए, तो उसका मुंह कड़वा हो गया और उसकी बहुत निंदा की।

कृष्णा की यह दशा देख गुरु जी मुस्कुरा रहे थे | पानी पिने के बाद कृष्णा को राहत मिली फिर उसने गुरु जी से हँसने का कारण पूछा | तब गुरु जी ने उससे कहा कि जब तुमने गुलाब का फुल सुंघा तो तुम्हे उसकी खुशबू बहुत अच्छी लगी और तुमने उसकी तारीफ की लेकिन जब तुमने नीम की पत्तियाँ खाई तो तुम्हे वो कड़वी लगी और तुमने उसे थूक दिया और उसकी निंदा भी की | गुरु जी से कृष्णा को समझाया जिस प्रकार तुम्हे जो अच्छा लगता हैं तुम उसकी तारीफ करते हो उसी प्रकार प्रजा भी जिसमे गुण होते हैं उसकी प्रशंसा करती हैं अगर तुम उनके साथ दुर्व्यवहार करोगे और उनसे प्रशंसा की उम्मीद करोगे तो वे यह कभी दिल से नही कर पायेंगे | इस प्रकार जहाँ गुण होते हैं वहाँ प्रशंसा होती हैं |
कृष्णा बहुत बदल जाता है और एक सफल राजा बनता है जब वह सभी बाते समझ जाता है और अपने महल लौट जाता है।
कहानी की शिक्षा
कृष्णा का जीवन गुरु की सिखाने से पूरी तरह बदल गया, जिससे वह एक क्रूर राजकुमार से एक दयालु और दयालु राजा बन गया. इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि अगर हममें अच्छे गुण हैं तो लोग हमें हमेशा पसंद करेंगे लेकिन अगर हम अच्छे नहीं हैं तो लोग हमें कभी नहीं पसंद करेंगे।
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