जादुई सोने के कंगन
पुरानी काशी में श्यामलाल नाम का एक मोची था। वह एक बहुत विनम्र व्यक्ति था। हर किसी की मदद करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। जब कोई मदद माँगने आया तो उसे दुखी होकर वापस नहीं लौटना पड़ा। एक दिन, मोची श्यामलाल रोज़ की तरह अपनी दुकान में अपना सामान लेकर बैठा था। उसने एक ब्राह्मण से अपने जूते सिलने के लिए कहा।
“तुम कहाँ से आए हो?” श्यामलाल ने ब्राह्मण से पूछा, जूता सीलते हुए।“ “मैं कावेरी तट से यहाँ गंगा माँ के दर्शन करने और नहाने आया हूँ,” ब्राह्मण देव ने कहा।“ मोची श्यामलाल ने तुरंत पूछा, “आज कावेरी नदी में पानी क्यों खत्म हो गया है?”
यह सुनकर ब्राह्मण हैरान हो गया। “तुम गंगा तट पर रहते हो और ऐसी बात कर रहे हो,” उसने श्यामलाल से कहा। क्या आप गंगा माँ का महत्व नहीं जानते? आपने कभी वहाँ स्नान करने और दर्शन करने के लिए नहीं गया?“ना मैं महत्व जानता हूँ और ना मैंने कभी वहाँ स्नान किया है,” श्यामलाल ने उत्तर दिया।
“गंगा तट पर रहकर ना गंगा की शक्ति का पता है और ना कुछ और,” ब्राह्मण देव ने कहा, जब श्यामलाल आगे बोलता। तभी तुम्हारा भाग फूट गया है।ब्राह्मण ने फिर श्यामलाल को गंगा माँ की महिमा बताई। श्यामलाल ने ब्राह्मण की बात सुनकर कहा, “अपना मन साफ़ हो तो हर तट का पानी गंगा है। “आपका जूता ठीक हो गया है,” श्यामलाल ने कहा और तुरंत जूता सिला। अब गंगा किनारे जाते हुए, क्या आप मुझ पर कुछ देंगे? “ज़रूर, बताओ क्या करना है?” ब्रह्मण ने पूछा।“ “आप जब गंगा में स्नान करेंगे तब उन्हें यह साबुत सुपारी अर्पण कर देना,” श्यामलाल ने कहा और एक साबुत सुपारी का टुकड़ा अपनी जेब से निकाला।“
श्यामलाल ने ब्राह्मणों से सुपारी लेकर गंगा किनारे जाने लगे। वहाँ स्नान करने के बाद ब्राह्मण देव ने हाथ में सुपारी लेकर कहा, “माँ, यह श्यामलाल ने आपके लिए भेजा है, इसे स्वीकार कीजिए। इसके बाद ब्राह्मण ने साबुत सुपारी को गंगा में डाल दिया। थोड़ी देर में एक हाथ गंगा में बहते हुए आया और ब्राह्मण के सामने रुक गया। सोने का एक कंगन उसके हाथ में था।
“श्यामलाल को मेरी तरफ से यह कंगन देना,” एक व्यक्ति ने कहा।“ ब्राह्मणों को गंगा माँ से श्यामलाल के लिए सोने का कंगन आता देख आश्चर्य हुआ। दंग ब्राह्मण ने कंगन उठाया। ब्राह्मण को कंगन हाथ में लेते ही लालच आ गई। उसने सोचा कि मैं श्यामलाल को यह कंगन नहीं देंगे। श्यामलाल को आखिर कैसे मालूम होगा कि माँ गंगा ने उसे कंगन देने को कहा है? ब्राह्मण इस विचार को अपनाने लगे।
कुछ दूर जाते ही उसे लगता था कि अगर मैंने यह कंगन बेचा तो मुझे चोरी का आरोप लगाया जा सकता है। मैं राजा को सीधे यह कंगन देता हूँ; वह खुश हो जाएगा और एक पुरस्कार भी देगा। इस विचार से ब्राह्मण सीधे राजमहल पहुंचे। वहाँ पहुँचते ही ब्राह्मण ने उन्हें कंगन देकर राजा को धन्यवाद दिया।
उस चमकदार कंगन से राजा और सभी लोग दंग रह गए। “ब्राह्मण देव, यह कंगन देखकर तो लगता है मानो यह स्वर्गलोक का है,” राजा ने कहा।“ वह कंगन राजा ने अपनी पत्नी को दिया। जब पत्नी ने कंगन पहना, तो वह खुश हो गई। “यह एक कंगन है, मुझे इसका दूसरा जोड़ा भी चाहिए,” राजा ने ब्राह्मण से कहा। जब रानी यह कंगन अपने दोनों हाथों में पहनेंगी, तो उनकी सुंदरता और भी बढ़ जाएगी।“
यह सुनते ही ब्राह्मणों को पसीना आ गया। “क्या हुआ, आप परेशान क्यों हो गये?” राजा ने तुरंत पूछा। यह कंगन चोरी का है न? नहीं-नहीं राजा साहब, यह चोरी का नहीं है,” ब्राह्मण ने तुरंत कहा। “ठीक है, आप आज शाम तक दूसरा कंगन लाकर मुझे दे दो,” राजा ने कहा। तभी मुझे विश्वास होगा कि यह चोरी नहीं है।“
राजा साहब, एक घबराया हुआ ब्राह्मण राजा के दरबार से बाहर चला गया। राजा ने ब्राह्मणों को कंगन की सच्चाई जानने के लिए अपने कुछ सैनिकों को उनके पीछे लगाया। राजमहल से बाहर निकालकर ब्राह्मण सीधे श्यामलाल के पास गए। उसने श्यामलाल को गंगा माँ के कंगन, उसके मन की इच्छा और राजा की विनती सब बताया। उसके बाद वह श्यामलाल से पूछने लगा कि दूसरा कंगन कैसे मिलेगा।
यह देखकर ब्राह्मण हैरान हो गए। यह चमत्कार देखकर राजा के सिपाही भी हैरान हो गए। यह सब देखकर वह सीधे राजा के पास गए और सब कुछ बताया। तब एक ब्राह्मण ने भी श्यामलाल को धन्यवाद कहा और कंगन लेकर राजमहल से निकल गया। वहाँ पहुँचते ही एक ब्राह्मण ने राजा को कंगन दिया। राजा ने चुपचाप कंगन लेकर उससे कुछ नहीं पूछा। राजा ने कंगन लेने के बाद खुद अपने सैनिकों के साथ श्यामलाल की दुकान पर जाकर उसे गंगा माँ की सेवा का पुरस्कार दिया।
यूनिकॉर्न की कहानी
देश समसानु था। शिकार करने में वहाँ की जनता अच्छी थी। कोई जानवर उनके हाथों से बच नहीं पाया। यूनिकॉर्न एक बार समसानु के शिकारियों से बच निकला। विभिन्न यूनिकॉर्न जीवों की तुलना में एक बहुत सुंदर था। यही कारण है कि लाख प्रयत्नों के बावजूद भी वह समसानु के लोगों के हाथ में नहीं आया। यूनिकॉर्न तभी से लोकप्रिय था।
समसानु देश का सरदार यूनिकॉर्न को हर हाल में मार डालना चाहता था। उसे पकड़ने के हर प्रयास में वह असफल रहता। इससे महीनों बीत गए। एक दिन, एक सफेद यूनिकॉर्न देशवासियों को आसमान में उड़ता दिखा। उसने यूनिकॉर्न पहुंचते ही लोग उसका पीछा करना शुरू कर दिया।
सरदार को तुरंत सूचना मिली। वह भी अपने महल से यूनिकॉर्न को पकड़ने के लिए जल्दी निकल गया। यूनिकॉर्न एक निकट की नदी से पानी पीता था। जब लोगों को पता चला, वे भी नदी के पास आए। साथ ही समसानु देश के सरदार वहाँ आए और सभी को थोड़ी दूरी पर खड़े रहने को कहा। हल्की आवाज़ में उन्होंने सबको बताया कि आज इसे बचकर जाने नहीं देना चाहिए। यही कारण है कि आपको अवसर देखकर ही इस पर हमला करना चाहिए। चुपचाप इसे देखो।
यूनिकॉर्न ने भी पूरी तरह से पानी पीकर फिर घास खाया। हरी घास खाने के बाद उसका पेट भर गया, तो वह वहीं लेट गया। सरदार ने सोचा कि यूनिकॉर्न को पकड़ने का यही समय था। उसने यूनिकॉर्न को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। तीनों ने एक लंबी रस्सी लाकर यूनिकॉर्न के गले में डाल दी। फिर पैरों में रस्सी फंसाकर उसे खींचने लगे। तभी यूनिकॉर्न जाग गया। यूनिकॉर्न ने अपने पैरों और गले में रस्सी देखकर रोना शुरू किया। यूनिकॉर्न को सहायता देने के लिए कौन आता? उसे सबने पकड़ लिया और पिंजरे में डाल दिया।
यूनिकॉर्न को पकड़कर सरदार बहुत खुश हो गया। उसने शाम को उत्सव मनाया। सभी लोग प्रसन्न होने लगे। जश्न के दौरान यूनिकॉर्न को भी पिंजरे में लाया गया था। तभी पता चला कि पास के ही एक क्षेत्र में आग लग गई है। देखते-देखते आग बढ़ गई। लोग चीखते-चिल्लाते हुए भागने लगे। लोगों ने आग को बुझाने की कोशिश की, लेकिन वह बढ़ती जा रही थी। यूनिकॉर्न भी आग देखकर डर गया। फिर जोर से चिल्लाया। इस बार एक लड़का सैम उसकी मदद करने आया। “तुम चिंता मत करो, मैं तुम्हारा पिंजरा खोल दूंगा,” उसने यूनिकॉर्न से कहा।बहुत मेहनत के बाद सैम पाँचवी बार पिंजरा खोलने में कामयाब हुआ।
जैसे ही पिंजरा खुला, यूनिकॉर्न ने सैम को अपनी पीठ पर बैठाकर आसमान में उड़ान भरी। सैम ने ऊपर से आग को देखा, जो भयानक थी। “क्या तुम हमारी मदद नहीं कर सकते?” उसने यूनिकॉर्न से पूछा। देखो, आग फैल रही है और लोग मर रहे हैं। सैम की बात सुनकर यूनिकॉर्न ज़मीन की ओर उतरा। उतरते ही उसने आग बुझा दी, अपने मुँह से ठंडी हवा फेंकी। पूरे क्षेत्र में आग बुझ गई, लोग खुश हो गए। यूनिकॉर्न ने आग बुझाते ही सैम को फिर से उड़ाकर दूसरे जंगल में चला गया।
दोनों ने कुछ समय साथ बिताया और एक अच्छी दोस्ती बनाई। तभी यूनिकॉर्न कुछ हट गया। सैम ने महसूस किया कि यूनिकॉर्न अब आसमान में उड़ने वाला था। “क्या तुम कभी वापस आओगे?” उसने यूनिकॉर्न से पूछा।"सैम को इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला। यूनिकॉर्न कुछ समय के लिए रुका और फिर आसमान में उड़ गया। सैम भी अपने घर दुखी होकर लौट आया। उससे यूनिकॉर्न और उसकी सवारी के बारे में पूछा गया। सैम ने यूनिकॉर्न को बहुत अच्छा बताया। लेकिन सैम दिल से दुखी था।सैम हर दिन उसी जंगल में यूनिकॉर्न से मिलने की आशा करता था, लेकिन यूनिकॉर्न कभी वापस नहीं आया।
रीमा और चिड़िया के घोंसले की कहानी
एक समय, रीमा नाम की एक लड़की थी, जो स्कूल में किए गए कामों में बहुत दिलचस्पी रखती थी। इस साल स्कूल में गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले, रीमा की शिक्षिका ने सभी को चिड़िया पर निबंध लिखने के लिए कहा और कई पक्षियों के चित्र दिखाए। स्कूल खुलते ही सभी बच्चों को निबंध शिक्षक को दिखाना था।
रीमा को पक्षियों की रंग-बिरंगी किताब बहुत पसंद आई। रीमा खुश हो गई जब शिक्षक ने बताया कि वे निबंध लिखेंगे और सबसे अच्छा लेखक को किताब इनाम में मिलेगी। टीचर ने बच्चों को सभी पक्षियों से कुछ कहानियाँ भी सुनाईं। इसके बाद स्कूल में गर्मियों का अवकाश था।
यही कारण था कि रीमा हर साल गर्मियों में कहीं-न-कहीं जाती थी। लेकिन इस छुट्टियों में रीमा हर रोज़ आसपास के बगीचे में जाकर पक्षियों और घोंसलों को देखने लगी। उस बगीचे में दर्जिन, लवा, गोरैया आते थे। रीमा बगीचे में आने वाली हर चिड़िया को जानने की कोशिश करती और उन्हें गौर से देखती रहती।
रीमा ने देखा कि हर चिड़िया पंख, घास, पत्ती और अन्य सामग्री को जोड़कर अपना घोंसला बनाती है। उसने सोचा कि चिड़िया को घोंसला बनाने में कितनी मेहनत लगती है। Teena चाहती थी कि वह उन पक्षियों को किसी भी तरह से मदद करे। रीमा ने एक दिन देखा कि एक बदमाश लड़के ने लवा चिड़ियों का घोंसला तोड़ दिया है। यह देखकर रीमा बहुत दुखी हुई। उसने सोचा कि मैं खुद कुछ घोंसले बना दूँगा। शायद ये इसका उपयोग करेंगे। रीमा को लगता था कि वह तुरंत घोंसला बनाकर तैयार कर देगी। लेकिन रीमा पूरा दिन चिड़िया का घोंसला तिनकों से बनाती रही। जब घोंसला तैयार हुआ, उसे पेड़ पर टिकाने के लिए कुछ भी नहीं मिला।
यह सब रीमा की माँ देख रही थी। “देखिए न, मैंने चिड़िया के लिए एक घोंसला बनाया है,” रीमा ने कहा। लेकिन चिड़िया इसे इतना सुंदर नहीं बनाती। मैंने सोचा था कि मैं एक सुंदर घोंसला बन जाऊँगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह घोंसला बहुत कठोर हो गया है। क्या आप इसे नरम करेंगे? रीमा की माँ ने उस घोंसले को किसी तरह थोड़ा ठीक किया। रीमा ने धागे की मदद से घोंसले को पेड़ पर टिका दिया। अब रीमा लवा पक्षी के आने का इंतज़ार करने लगी। जब वे पक्षी बगीचे में गए, उन्होंने रीमा द्वारा बनाया गया घोंसला नहीं प्रयोग किया। “तुम परेशान मत होना, अभी चिड़िया घोंसले पर आ जाएगी,” उसकी माँ ने रीमा को उदास देखकर कहा।“
रीमा का घोंसला एक लवा पक्षी ने तोड़ दिया। रीमा ने इसके बाद मुँह लटका दिया। तब उसकी माँ ने उसे बताया कि दुखी नहीं होना चाहिए। देखो, लवा पक्षी अपने लिए घोंसला सिर्फ अपने हाथों से बना रहे हैं। शायद वे दूसरों का बनाया हुआ घोंसला नहीं चाहते हैं। “माँ मैं अपने स्कूल के निबंध में यह सब कुछ लिखूंगी,” रीमा ने दुखी स्वर में कहा।" कुछ देर बाद रीमा ने कहा, “माँ आपने देखा कि लवा पक्षी अपना घर झाड़ियों में बना रहे हैं। “हाँ बेटा, मैंने सुना था कि लवा पक्षी अपना घोंसला किसी के घर के रोशनदान या पेड़ पर ही बनाते हैं,” रीमा की माँ ने कहा। आज यह नया है।"
कुछ दिनों बाद, रीमा ने लवा पक्षियों के बारे में और जानकारी प्राप्त की कि वे अपने घोंसले में सीधे नहीं उड़ते। वह अपने घोंसले से कुछ दूर ठहरते हैं और उधर-उधर कूदते हैं, ताकि कोई उन्हें नहीं खोज पाए। गर्मियों की छुट्टियाँ थोड़े ही दिनों में समाप्त हो गईं। लवा पक्षी के बारे में रीमा ने स्कूल जाकर निबंध प्रतियोगिता में जीत हासिल की। रीमा को मनपसंद चिड़ियों वाली किताब ईनाम में मिलने पर खुशी हुई। प्रतियोगिता जीतने के बाद भी रीमा हर दिन उस बगीचे में चिड़ियों की चहचहाहट सुनने के लिए घंटों बैठती है। मानो उसकी चिड़ियों से प्यार हो गया हो।
सीख
चिड़िया के घोंसले की कहानी हमें सिखाती है कि छोटी-छोटी बातों पर दुखी नहीं होना चाहिए। हमारे आसपास की चीज़ों पर गौर करना भी हमें बहुत कुछ नया सिखाता है।
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