ब्लडी मैरी की कहानी
हेनरी आठवें के समय से लेकर चौथे शहंशाह थे, और उनकी राजगद्दी 1509 से 1547 तक चली। राजा हेनरी की कई पत्नियाँ थीं और उनकी दो बेटियाँ, एलिजाबेथ और मैरी भी थीं। मैरी राजा की पहली पत्नी की बेटी थी। राजा हेनरी को मैरी पसंद नहीं थी, इसलिए उन्होंने उसके प्रति बुरा व्यवहार किया। मैरी महल के नौकरों के साथ महल के काम में लगी रहती थी। जब भी मैरी कुछ कहती, राजा उसे ध्यान नहीं देते थे।
1547 ईस्वी में राजा हेनरी की मृत्यु के बाद, जनता की इच्छा के अनुसार इंग्लैंड की राजगद्दी को हेनरी की पहली बेटी मैरी को सौंप दिया गया। उसने इंग्लैंड की रानी के रूप में स्वीकार किया। उस समय इंग्लैंड की स्थिति आधिकारिकता नहीं थी। इंग्लैंड में कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट धर्मों का बहुत विवाद था। इस संदर्भ में, इन दोनों धर्मों के अनुयायी लोगों के बीच टकराव हुआ था।
रानी मैरी की इच्छा थी कि पूरे इंग्लैंड में केवल एक ही धर्म होना चाहिए, लेकिन लोगों ने उसकी इस बात को स्वीकारने से इनकार कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप, रानी ने उन लोगों को जिन्होंने उसकी बात को अस्वीकार किया, मौत की सजा दी थी। वह ऐसे लोगों को जीवित भी जला देती थीं। इसके कारण, इंग्लैंड के लोग रानी मैरी से नफरत करने लगे।

रानी मैरी के बारे में ऐसी अफवाहें भी प्रचलित हुईं कि वह कुंवारी जवान लड़कियों के खून से नहाती थीं, क्योंकि उन्हें ऐसा मान्यता थी कि उनके खून से नहाने से वह अधिक समय तक युवा रह सकती हैं। कुछ सालों बाद रानी मैरी ने विवाह कर लिया और थोड़ी देर बाद एक समाचार इंग्लैंड में सामने आई कि रानी मैरी गर्भवती हैं और शीघ्र ही उन्हें अपने राज्य का नया राजा भी मिलेगा।
रानी मैरी के साथ वाकई में एक विचित्र घटना घटी। उनके गर्भ से कोई बच्चा जन्म नहीं हुआ, बल्कि कुछ महीनों के बाद रानी मैरी का पेट पुरानी रूप से वापस आ गया। तत्पश्चात, स्थानीय लोग अपनी तंत्र-विद्या के अनुसार बताते थे कि रानी मैरी के गर्भ में कोई बच्चा नहीं था, बल्कि एक आत्मा या भूत अपनी निवास स्थान के रूप में था।
बाद में रानी मैरी फिर से उसी भूत के गर्भवती हो गईं, लेकिन इस बार भी कोई बच्चा नहीं हुआ और थोड़ी देर बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद, मैरी की छोटी बहन एलिजाबेथ को इंग्लैंड की राजगद्दी पर बैठाया गया और एलिजाबेथ ने इंग्लैंड की नई रानी के रूप में अपनी पदवी संभाली।
रानी मैरी की कथा ब्लडी मैरी के रूप में लोगों द्वारा जानी जाती थी और उसके अन्दर विराजमान भूत की बात एक काल्पनिक तत्व है। इस कथा से हमें व्यक्तिगत महत्व देने, उनके बारे में अवगत न होकर उन्हें शापित करने और नामकरण करने की गलती से बचने की सीख मिलती है। साथ ही, यह कथा हमें मानवीय गुणों जैसे शांति, समय की प्रशंसा और साथी प्राणियों के प्रति करुणा के महत्व को समझाती है।
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