1) आलस से दूर रहो:
अक्सर हम किसी काम को करने के लिए मन से निर्णय तो लेते हैं, लेकिन समय पर हम आलस्यग्रस्त हो जाते हैं। यह आपको भी पता होगा कि कई बार सुबह जल्दी उठने का निर्णय लेने के बावजूद हम आलस्य के कारण उठ नहीं पाते हैं और समय पर नींद पूरी न होने या ठंड का बहाना बनाकर फिर से सो जाते हैं।
हम अपने सुखी स्थान में रहने के कारण ही जटिलताओं से बचते हैं। इसलिए, यदि आप अपनी सुखी स्थान से बाहर निकलना चाहते हैं, तो आपको अपने आलस को खत्म करना होगा।
2) अपने डर को भगाओ:
अक्सर हमें अपने भीतर संग्रहित डर के कारण नई चीजों को करने की सोच नहीं आती है और यह वास्तविकता है कि हम अपने जीवन में किसी भी प्रकार के परिवर्तन को नहीं चाहते हैं क्योंकि हम परिवर्तन से डरते हैं।
हमें चाहिए कि हम बिना किसी खतरे या समस्याओं के जीवन बिताना चाहते हैं और हमारी यही डर है जो हमें दूसरी बाहरी गतिविधियों को करने से रोकता है, इसलिए हम आत्मसंयम से बाहरी सीमाओं से बाहर नहीं निकल पाते हैं। इसके बजाय, किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए आत्मविश्वास रखें और जीवन में किसी भी समस्या से डरने की बजाय, उसका सामना करें।
3) रिस्क लो:
उन लोगों के बारे में कहा जाता है जो अपने आरामदायक स्थान से बाहर नहीं निकलते हैं कि उन्हें किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेना पड़ता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्हें अपनी जीवन में कोई विशेष परिवर्तन की इच्छा नहीं होती है, और वे बस यही सोचते हैं कि "चल रहा है, चलने दो"। इस मानसिकता के साथ वे अपने जीवन को बिताते हैं। सोच-समझकर छोटे-बड़े जोखिम लेने से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है, हम अपने गुणों को समझते हैं, हमें नई अवसर मिलते हैं और हम अपनी आरामदायक स्थान से बाहर निकलकर अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं।
4) छोटी शुरुवात करो:
जब हमें किसी नई चीज़ की शुरुआत करनी होती है, तो हमें वह चीज़ मुश्किल लगती है। हमें उस चीज़ के साथ आलस्य महसूस होने लगता है और इसलिए हम उसे टालने की कोशिश करते हैं और अपने सुखदायक क्षेत्र में ही बने रहना पसंद करते हैं।
इसलिए, जब भी कोई नया काम शुरू करते हैं, उसे बहुत छोटे स्तर पर शुरू करें, जैसे कि अगर कल सुबह उठकर दौड़ना है, तो पहले दिन आप एक घंटे तक दौड़ नहीं लगा सकते। आप थक जाएंगे। इसलिए, पहले दिन सिर्फ दस मिनट दौड़ सकते हैं, दूसरे दिन पंद्रह मिनट, और इसी तरह से अपने दौड़ने का समय बढ़ा सकते हैं। इससे आपकी दौड़ने की आदत बनेगी और इस तरीके से आप कोई नई चीज़ सीख सकते हैं और अपनी सुविधा क्षेत्र को छोड़ सकते हैं।
5) परिणामों के बारे में सोचो:
[[add]]यदि आप अपनी टालमटोल की आदत या डर के कारण अपनी comfort zone से बाहर नए काम की शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, तो इसके बारे में विचार करें क्योंकि भविष्य में इसके कुछ परिणाम हो सकते हैं जो आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे आप अपनी comfort zone से बाहर निकलकर कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
यदि मान लीजिए, तीन महीने बाद आपके परीक्षा हैं और आप जगह-जगह घुमक्कड़ी करके समय गवा रहे हैं, तो आपका परिणाम अच्छा नहीं आ सकता है या फिर आप असफल भी हो सकते हैं। वहीं, यदि आप पढ़ाई करेंगे, तो आप अच्छे अंकों से पास हो जाएंगे। अगर आप भी महत्वपूर्ण चीजों को टालते रहते हैं, तो आपको उसके परिणामों पर विचार करके सही निर्णय लेने की जरूरत है और उस कार्य पर काम करना है, अपनी सुविधा क्षेत्र से बाहर आने की।
6) नयी चीज़ें सीखो:
समय-समय पर ऐसी नई-नई चीजें सीखते रहो, जो थोड़ी चुनौतीपूर्ण हों, जैसे कि कोई नई भाषा सीख लो, कार चलाना सीख लो या कोई अन्य कौशल सीख लो। इसके अतिरिक्त, नए लोगों से मिलो, उनसे बात करो और जो चीजों से आपको डर लगता है, उनकी अभ्यास को बार-बार करो। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, आप पहले से बेहतर बन जाते हो और आप अपनी सामर्थ्य सीमा से बाहर निकल पाते हो।
7) अपनी मानसिकता बदलो:
हमें कई बार अपने बारे में नकारात्मक विचार आते हैं, जैसे कि हम अपने को कमजोर मानते हैं, अपनी क्षमताओं पर भरोसा नहीं रखते और खुद के बारे में नकारात्मक सोचते हैं। इस तरह के मानसिक मोड के कारण हम अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते हैं और कहीं न कहीं हम अपनी सुरक्षा क्षेत्र में ही रह जाते हैं। इसलिए, अपने पुराने सोच को छोड़कर अपनी प्रशंसायें पहचानें और अपनी कमियों पर काम करें। इससे आप अपनी सुरक्षा क्षेत्र से बाहर निकल सकते हैं और अपने जीवन को सुधार सकते हैं।
8) लोगों की बातों में मत आओ:
यह सबसे महत्वपूर्ण समस्या है कि हम निर्णय लेते समय लोगों के बारे में विचार करते हैं और उनकी सलाह लेने लगते हैं, चाहे वह पढ़ाई के मामले हों, करियर के मामले हों या किसी अन्य विषय के मामले हों। हम अक्सर लोगों के विचारों में आकर अपनी सहज जगह से बाहर नहीं निकल पाते हैं और इसका हमारे विकास पर प्रभाव पड़ता है।
हमे लगता है कि लोग हमारी सही सलाह देंगे, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता क्योंकि लोग भी गलत हो सकते हैं और उनकी राय पुरानी सोच के आधार पर हो सकती है। इसलिए, लोगों की बातों पर अधिक न चलें। अगर आपको आवश्यकता हो तो आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं, लेकिन अपने करियर से जुड़े किसी भी क्षेत्र का अनुभव न रखने वाले लोगों की सलाह कभी न लें।
9) इच्छाशक्ति को मजबूत करो:
बहुत सारे लोग बड़े-बड़े सपने देखते हैं, लेकिन कहीं न कहीं उनकी इच्छाशक्ति कम हो जाती है और वे अपने कंफर्ट ज़ोन में ही रहकर अपने जीवन में समझौता कर लेते हैं। हालांकि, आपकी इच्छाशक्ति मजबूत होने के कारण आप अपने कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हो। इसलिए, अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत करें।
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