1) Specific: आपका लक्ष्य वास्तव में स्पष्ट होना चाहिए। इसे सुनकर या पढ़कर, आपके मन में किसी भी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। यदि कोई कहता है कि उसे 'अच्छे नंबर लाने हैं', तो यह स्पष्ट नहीं होता कि वह किस विषय या परीक्षा की बात कर रहा है, जिसमें उसे अच्छे नंबर चाहिए। और 'अच्छे से' का क्या अर्थ है? किसी के लिए 100 में 80 भी अच्छा हो सकता है और किसी के लिए 100 में 60 भी अच्छा हो सकता है।
इसी तरह कई लोग यह कहते हैं कि मेरा लक्ष्य है कि मैं एक सफल व्यक्ति बनूं। पर जब आप उनसे पूछेंगे कि किस क्षेत्र में, तो शायद वे कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाएंगे। अर्थात्, वे अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट नहीं हैं, और जब लक्ष्य स्पष्ट नहीं होता है, तो उसके प्राप्ति की बात ही नहीं उठती।
2) Measurable: आपका लक्ष्य ऐसा होना चाहिए जिसे किसी मापनीय मात्रा में जांचा जा सके। अर्थात्, उस लक्ष्य के साथ कोई नंबर, कोई संख्या जुड़ी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई कहता है कि उसका लक्ष्य वजन कम करना है, तो सवाल उठता है कि कितना कम करना है। जब लक्ष्य के साथ नंबर्स जुड़ जाते हैं, तो आप अपनी प्रगति को माप सकते हैं। और यह पता कर सकते हैं कि आपने अपने लक्ष्य को सही तरीके से पूरा किया है या नहीं। इसलिए एक अच्छा लक्ष्य हमेशा मापनीय होता है।
3) Achievable: यदि आप एक ऐसा लक्ष्य बनाते हैं जो आपको अंदर से वैसी भावना देता है कि यह तो असंभाव है, तो ऐसे लक्ष्य का कोई मतलब नहीं होता। दोस्तों, हमारा अवचेतन मन चेतन मन से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है, यदि आप चेतन मन से कोई असंभाव लक्ष्य बनाएंगे और अवचेतन मन उसे समर्थन नहीं करेगा तो आपके लक्ष्य पूरे होने की संभावनाएँ कम होंगी। उदाहरण के रूप में, यदि आप निर्णय करते हैं कि आपको गणित में 100 नंबर लाने हैं और आपके पास के पूर्व रिकॉर्ड दिखाते हैं कि आपका इस विषय में पास होना भी मुश्किल होता है, तो आपका अवचेतन मन इसे अस्वीकार कर देगा और आप यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाएंगे। वहीं, अगर आप 75% मार्क्स प्राप्त करने का लक्ष्य बनाते हैं तो आपके सफल होने की संभावना बहुत अधिक होगी।
4) Realistic: आपका लक्ष्य आपके लिए वास्तविक होना चाहिए। 'योग्य और वास्तविक' में एक पतली सी रेखा होती है। जिस लक्ष्य को हम वास्तविक मानते हैं, उसे हम प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन जो हम प्राप्त कर सकते हैं, वो आवश्यक रूप से वास्तविक नहीं होता। उदाहरण के लिए, परीक्षा में टॉप करना एक प्राप्तियोग्य लक्ष्य हो सकता है, लेकिन यदि आपने अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं की है और कुछ ही दिन बचे हैं, तो यह वास्तविक नहीं हो सकता कि आप टॉप कर पाएंगे। हमेशा अपनी क्षमता के मुताबिक वास्तविक लक्ष्य तय करें। यह भी ध्यान दें कि कोई काम किसी और के लिए वास्तविक हो सकता है, परंतु आपको उसे अपने दृष्टिकोण से देखना है और अपने लक्ष्यों को तय करने हैं।
5) Time-Bound: आपके लक्ष्यों के साथ यदि आप समय सीमा निर्धारित नहीं करेंगे तो आपको उन्हें पूरा करने की तत्परता महसूस नहीं होगी और आप उन्हें पूरा करने के लिए उचित प्रयास नहीं कर पाएंगे। इसलिए लक्ष्य तय करते समय यह तय करना कि उन्हें कब तक पूरा करना है, यह बेहद महत्वपूर्ण है। मैंने कई बार लोगों से सुना है कि वे 'बिजनेस शुरू करना है', पर यह कम ही सुनते हैं कि उन्हें इस साल के इस महीने से बिजनेस शुरू करना है। इसलिए, जब भी आप अपने लक्ष्य बनाएं, उन्हें कब तक पूरा करना है यह निर्धारित करें और उन्हें अपनी सोच का हिस्सा बनाएं, ऐसा करने से आपके लक्ष्यों को पूरा करने में Law of Attraction भी मदद कर सकता है।
कमेंट्स