तुलना करने के हानिकारक प्रभाव।
1. Comparison से हम अपना किमती समय खो देते है।
अपनी प्रगति को दूसरों के साथ तुलना नहीं करनी चाहिए। हमें अपना मूल्यवान समय खुद के स्वागत में नये कौशल सिखने और अपनी स्वतंत्रता में विकसित करने में बिताना चाहिए। हमें अपनी खुद की प्रगति करनी चाहिए, लेकिन दूसरों के साथ अपने आप को मूल्यांकन करके हम अपना मूल्यवान समय दूसरों के साथ तुलना करते हैं, और इससे हम दूसरों से पीछे रह जाते हैं।
2. दूसरों से compair करके हम अपना आत्म-सम्मान ,passion खो देते हैं।
जब हम दूसरों के साथ अपनी तुलना करते हैं, तो हम अक्सर खुद पर संदेह करते हैं और उन्हें अधिक महत्व देने लगते हैं। हम दूसरों पर विश्वास करने लगते हैं और यह मानने लगते हैं कि उनके पास हमसे बेहतर व्यक्तिगतता है। हम उन्हें खुदसे बेहतर दिखने लगते हैं और उन्हें हमसे अधिक सफल मानते हैं। इसके परिणामस्वरूप, हम अकेले अपनी व्यक्तिगत प्रगति पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय दूसरों की तुलना करने में विशेष रूप से वक्त बर्बाद करते हैं।
3. आप एक unique पर्सनैलिटी है। यह आप भूल जाते हैं।
आपका ज्ञान, आपकी सफलता, और आपकी विशेष क्वालिटी सब अद्वितीय हैं। आपका आज का भूमिका दुनिया में एकमात्र है और उसकी तुलना नहीं की जा सकती।
4. तुलना करने की आदत हो जाती है।
जब हम तुलना करने की आदत बना लेते हैं, तो हम अक्सर यह सोचते रहते हैं कि हम सफल होने के बावजूद भी किसी दूसरे से मिलाकर अपने आप को मापते हैं। हम अपने जीवन का नियंत्रण दूसरों के हाथों में सौंप देते हैं और उनके व्यवहार को अपने मानसिक स्थिति से जोड़ देते हैं। इससे हम अकेले अपने खुद पर कम ध्यान देने लगते हैं।
5. Comparison से हम Life की खुशी खो देते है।
तुलना करने से हमारे जीवन में कोई गुणवत्ता नहीं आती। हम जो काम कर रहे हैं, उसमें संतोष नहीं पा सकते। हम तब सिर्फ दूसरों के साथ तुलना करते हैं कि वे क्या बढ़िया कर रहे हैं, इसके बजाय कि हम अपने काम के लिए संतुष्ट हों। हम अपने आप में ईर्ष्या की भावना उत्पन्न करते हैं, और इस नकारात्मक भावना के कारण हम अपने जीवन की सभी छोटी-छोटी खुशियों को खो देते हैं।
खुद को दूसरों के साथ तुलना करने से कैसे रोके ?
1. दूसरों के साथ comparison के कौनसे बुरे प्रभाव है इससे अवगत होना।
जब तक हम बीमारी के बारे में जागरूक नहीं होते, हम उस बीमारी के इलाज के बारे में नहीं सोच सकते। उसी तरह, जब तक आपको यह पता नहीं होता कि आप तुलना कर रहे हैं, तब तक आप उसे रोकने के बारे में सोच नहीं सकते। आपको सोचने के बाद ही आप तुलना करने से खुद को रोक सकते हैं।
2. अपनी तुलना दूसरों से मत करना। खुद की सफलता की ओर देखें।
हमारे पास कोई भी पेशेवर क्षेत्र हो, हम वहां पर कुछ विशेष गुणधर्म होते हैं। हमारी विशेष क्षमता होती है, हमारा अनूभव होता है, और प्रत्येक व्यक्ति की एक अनूठी व्यक्तित्व होती है। इसलिए वह अपने क्षेत्र में सफल होता है। जब हम अपनी सफलता की दिशा में देखते हैं, तो हम खुद के विशेषता को पहचानते हैं और उन विशेषताओं को सुधारने के लिए अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
3. लाइफ में बड़ा सोचो।
जब आप अपने लक्ष्य को बड़ा रखते हैं, तो आप अपने लक्ष्य पर समर्पित रहते हैं। आप अपने समय को दूसरों की तुलना में बर्बाद नहीं करते। जब आपकी सोच महत्वपूर्ण होती है, तो तुलना की नकारात्मक भावना दूर हो जाती है। आप दूसरों की सफलता में खुश होने की सकारात्मक भावना को अपनाते हैं।
4. दूसरों की तारीफ करो।
तारीफ करने से हम दूसरों के गुणों के बारे में विचार करते हैं और उनकी प्रशंसा करते हैं। इसके माध्यम से हम उनके गुणों से प्रेरणा लेते हैं और उनसे सीखते हैं। ये गुण हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और हमें सफलता की दिशा में मदद करते हैं, इसलिए दूसरों की सराहना करके हम स्वयं को सुधारने के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।
5. जो मिला है ,उसमें कृतज्ञ रहना।अपनी तुलना दूसरों से मत करना।
अपनी तुलना दूसरों से मत करें। हमें वह कुछ जो हमने हासिल किया है, के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। यह हमें अंदर से संतुष्ट और आत्मविश्वासित बनाता है। इसके परिणामस्वरूप, हम अपने आगे के लक्ष्यों और योजनाओं पर 100% ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है, और हम दूसरों के साथ तुलना नहीं करते।
6. दूसरों को देखकर खुद में प्रेरणा जागृत करो।
सफलता प्राप्त करने के लिए मोटिवेशन की आवश्यकता होती है। जब हम दूसरों के गुणों को देखकर खुद में सुधार करने का निर्णय लेते हैं या अपने आप को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाते हैं, तो यह मोटिवेशन हमारे साथ लंबे समय तक बना रहता है। मोटिवेशन के साथ हम अपने आत्मा को सुधारते हैं और दूसरों के साथ तुलना नहीं करते।
7. कॉन्पिटिशन खुद का खुद के साथ कीजिये।
जब हम आज को कल से बेहतर देखने का प्रयास करते हैं, तो हम अपने आत्मा में सुधार करने का काम शुरू करते हैं, और यही हमें सफलता की दिशा में बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।
8. हर दिन कुछ नया सोचो। नया करो।
रोज़ कुछ नया सीखने और करने से हम अपना आत्मसम्मान बढ़ाते हैं और खुद को आत्मविश्वास से भरपूर महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप, हम दूसरों के साथ तुलना करने की नकारात्मक भावना से दूर रहते हैं।
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