व्याकरण किसे कहते हैं | व्याकरण के भेद, परिभाषा और उदाहरण
व्याकरण किसे कहते हैंव्याकरण की परिभाषा: किसी भी भाषा को सही तरीके से और शुद्ध रूप से बोलने के लिए, लिखने के लिए और समझने के लिए कुछ नियम होते हैं और उन्हीं नियमों को हम व्याकरण कहते हैं. व्याकरण एक ऐसा शास्त्र है जिसमें उस भाषा को लिखने, बोलने और समझने के नियम संग्रहित है.
अगर आपको किसी भाषा को सही तरीके से और शुद्ध रूप से सीखना है तो सबसे पहले आपको उस भाषा के व्याकरण को सीखना होगा. व्याकरण को इंग्लिश में Grammar कहते हैं. हिंदी, गुजराती, English और इसी तरह बहुत सारी भाषाएं होती है जिसे अगर आपको सही तरीके से सीखना है तो आपको इन सभी भाषाओं के ग्रामर को अच्छी तरीके से समझना होगा, तभी आप उस भाषा को बोल पाओगे और उस भाषा को लिख पाओगे. बिना व्याकरण सीखें हम भाषा को बोल तो सकते हैं पर सही तरीके से नहीं बोल सकते.
संस्कृत भाषा बहुत प्राचीन भाषा है और हिंदी, गुजराती जैसी कई सारी भाषा संस्कृत भाषा से ही आई हैं. हमारे प्राचीन वेद और ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं जोकि व्याकरण का सबसे बड़ा उदाहरण हैं. हमारे वेद और प्राचीन ग्रंथों में संस्कृत में श्लोक लिखे गए हैं जिसमें संस्कृत भाषा के व्याकरण का पूरा पालन किया गया है. भारत में बोली जाने वाली ज्यादातर भाषाएं संस्कृत भाषा से उत्पन्न हुई है और हर एक भाषा का अपना एक व्याकरण होता है, जिसे देखकर, समझ कर व्याकरण के कितने भेद होते हैं
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भाषा में व्याकरण अलग-अलग रूप से होता है और उनमें कुछ हद तक थोड़ा अंतर होता हैं. यदि हम व्याकरण के भेद के बारे में बात करें तो व्याकरण के चार भेद हैं जिसे हम व्याकरण के अंग भी कहते हैं.
व्याकरण के प्रकार:वर्ण
शब्द
पद
वाक्य
तो व्याकरण के चार भेद होते हैं. अब हम व्याकरण के इन चारों प्रकार के बारे में एक-एक करके जानते हैं और समझते हैं.वर्ण भाषा का सबसे छोटा भाग होता है जिसे हम आगे विभाजित नहीं कर सकते. जैसे ही क, ख, ग,… ज्ञ. अगर आपको किसी भाषा को सीखना है तो सबसे पहले आपको उस भाषा के वर्णों के बारे में जानना होगा तभी आप उस भाषा को सही रूप से सीख पाएंगे और समझ पाएंगे. अगर आपको किसी भाषा को लिखना है तो आपको उस भाषा में उपयोग किए जाने वाले वर्णों को लिखना होगा, आपको उस भाषा की वर्णमाला सीखनी होगी. अगर आपको हिंदी भाषा सीखनी है तो सबसे पहले आपको हिंदी वर्णमाला सीखनी होगी तभी आप यह समझ पाएंगे कि हिंदी में कितने वर्ण होते हैं और उसे किस प्रकार से लिखा जाता है और बोला जाता है.
2. शब्दजब हम दो या दो से अधिक वर्णों को एक साथ जोड़ते हैं तब शब्द की रचना होती है. वर्णों को तो हम विभाजित नहीं कर सकते पर शब्द को हम विभाजित कर सकते हैं. अगर आप किसी दो वर्ण को आपस में मिलाओगे तो वह एक शब्द बन जाएगा जैसे कि, राजन, शेर, किताब, इत्यादि. दिए गए उदाहरण को समझें. राजन एक शब्द है जिसमें र, ज और न का उपयोग किया गया है और इन तीनो वर्णों को मिलाकर एक शब्द बना है. हिंदी व्याकरण में शब्द भी दो प्रकार के होते हैं. विकारी शब्द और अविकारी शब्द यह शब्द के दो भाग हैं. विकारी शब्द ऐसे शब्द होते हैं जिनका अगर हम वाक्य में उपयोग करें तो उस वाक्य का मतलब थोड़ा सा बदल जाता है. अविकारी शब्द ऐसे शब्द होते हैं जिनका की वाक्य में उपयोग करने से वाक्य के अर्थ में कोई बदलाव नहीं होता है.
3. पदजब हम किसी वाक्य में कुछ शब्दों का उपयोग करते हैं तो उनमें से कुछ शब्दों को पद मिलता है. इसे एक उदाहरण लेकर समझने का प्रयास करते हैं. “किशन ताजमहल घूमने जा रहा है”, तो इस वाक्य में किशन शब्द को एक पद मिला हुआ. जिसे हम संज्ञा भी कहते हैं.
4. वाक्यजब बहुत सारे शब्दों का आपस में मिलन होता है और उस शब्दों के समूह से कुछ अर्थ उत्पन्न होता है तो उसे हम वाक्य कहते हैं. शब्दों के समूह को ही हम वाक्य कहते हैं. एक वाक्य में बहुत सारे शब्द आपस में जुड़े हुए होते हैं जिन्हें बोलने से कुछ भाव प्रकट होता है और उस वाक्य का कुछ अर्थ निकलता है. जैसे कि, “मनोज को खेलना पसंद है” तो इस वाक्य में मनोज, को, खेलना, पसंद, हैं, इतने शब्द है और यह सारे शब्द मिलकर एक वाक्य की रचना करते हैं. इसी तरह हर एक भाषा में कुछ शब्द होते हैं जिसे आपस में जोड़कर आप एक वाक्य बना सकते हैं जिसका की कोई अर्थ निकलता हो.
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