हिंदी व्याकरण : कारक

हिंदी व्याकरण : कारक

Karak किसे कहते हैं?

कारक वह रूप होता है जिसमें संज्ञा या सर्वनाम शब्द का सीधा सम्बन्ध किसी दूसरे शब्द (क्रिया) के साथ होता है। इसे वह शब्द कहा जाता है जो किसी क्रिया को करने में मुख्य भूमिका निभाता है।

कारक की परिभाषा

वाक्य में प्रयुक्त शब्द आपस में संबद्ध होते हैं। क्रिया के साथ संज्ञा का सीधा सम्बन्ध ही कारक (Karak) होता है। कारक को प्रकट करने के लिए संज्ञा और सर्वनाम के साथ जो चिह्न लगाए जाते हैं, उन्हें विभक्तियाँ कहते हैं।

उदाहरण के रूप में: पेड़ में फल लगते हैं।

कारक के भेद

कारक विभक्तियाँ
कर्ता ने
कर्म को
करण से, द्वारा
सम्प्रदान को, के लिये, हेतु
अपादान से (अलग होने के अर्थ में)
सम्बन्ध का, की, के, रा, री, रे
अधिकरण  में, पर
सम्बोधन हे! अरे! ऐ! ओ! हाय!

कारक के उदाहरण

  • राम ने रावण को मारा।
  • देवांग रोज ऑफिस जाते हैं।
  • राज आम खाता है।
  • विशाखा ने बुक पढ़ी।
  • रमेश ने पत्र लिखा।
कर्ता कारक

संज्ञा या सर्वनाम जिस रूप से क्रिया के करने वाले का बोध होता है, उसे कर्ता (Karak) कहते हैं। इसका चिह्न 'ने' कभी कर्ता के साथ लगता है और कभी वाक्य में नहीं होता है, अर्थात लुप्त होता है। कर्ता कारक का उदाहरण –

  • रमेश ने पुस्तक पढ़ी।
  • राजेन्द्र ने पत्र लिखा।
  • अध्यापक ने विद्यार्थियों को पढ़ाया।
  • पुजारी जी पूजा कर रहे हैं।
  • कृष्ण ने सुदामा की सहायता की।
  • सीता खाती है।
कर्मकारक

संज्ञा या सर्वनाम जिस रूप में क्रिया का प्रभाव या फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहा जाता है। कर्म के साथ 'को' विभक्ति आती है, जो इसकी पहचान होती है। कभी-कभी वाक्यों में 'को' विभक्ति का अप्रयोग भी हो सकता है। कर्म कारक के उदाहरण -

  • कविता पुस्तक पढ़ रही है।
  • गोपाल ने राधा को बुलाया।
  • मेरे द्वारा यह काम हुआ।
  • कृष्ण ने कंस को मारा।
  • राम को बुलाओ।
  • बड़ों को सम्मान दो।
  • माँ बच्चे को सुला रही है।
  • उसने पत्र लिखा।

'कहना' और 'पूछना' के साथ 'से' का प्रयोग होता है। इनके साथ 'को' का प्रयोग नहीं होता है।

  • कबीर ने रहीम से कहा।
  • मोहन ने कविता से पूछा।
  • रजत ने हिमांशू से पूछा।
करण कारक

जिस साधन से या जिसके द्वारा क्रिया पूरी की जाती है, उस संज्ञा को करण कारक कहा जाता है। इसकी पहचान 'से' या 'द्वारा' होती है। करण कारक के उदाहरण -

  • रहीम गेंद से खेलता है।
  • आदमी चोर को लाठी द्वारा मारता है।
  • प्रशांत गाड़ी चलाता है।
सम्प्रदान कारक

जिसके लिए क्रिया की जाती है, उसे सम्प्रदान कारक कहा जाता है। इसमें कर्म कारक 'को' भी प्रयुक्त होता है, लेकिन उसका अर्थ 'के लिए' होता है।

  • माँ बच्चे को खिलौना देती है।
  • माँ बेटे के लिए सेब लायी।
  • अमन ने श्याम को गाड़ी दी।
  • मैं सूरज के लिए चाय बना रहा हूँ।
  • मैं बाजार को जा रहा हूँ।
  • भूखे के लिए रोटी लाओ।
अपादान कारक

अपादान का अर्थ है - अलग होना। जिस संज्ञा या सर्वनाम से किसी वस्तु का अलग होना मालूम हो, उसे अपादान कारक कहा जाता है। करण कारक की तरह अपादान कारक का चिह्न भी 'से' है, परन्तु करण कारक में इसका अर्थ सहायता होता है और अपादान में वस्तु का अलग होना होता है। अपादान कारक के उदाहरण -

  • राहुल के हाथ से फल गिरता है।
  • गंगा हिमालय से निकलती है।
  • लड़का छत से गिरा है।
  • पेड़ से पत्ते गिरे।
  • आसमान से बूँदें गिरी।
  • वह साँप से डरता है।
सम्बन्ध कारक

संज्ञा या सर्वनाम के वह रूप जिससे एक वस्तु का सम्बन्ध दूसरी वस्तु से जाना जा सके, उसे सम्बन्ध कारक कहा जाता है। इसकी मुख्य पहचान है 'का', 'की', 'के'। सम्बन्ध कारक के उदाहरण -

  • राहुल की किताब मेज पर है।
  • सुनीता का घर दूर है।
अधिकरण कारक

संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। इसकी मुख्य पहचान है ’में’, ’पर’ होती है । अधिकरण कारक के उदाहरण –

  • घर पर माँ है।
  • घोंसले में चिङिया है।
  • सड़क पर गाड़ी खड़ी है।
सम्बोधन कारक

संज्ञा या सर्वनाम के उस रूप को सम्बोधन कारक कहा जाता है, जिससे किसी को पुकारने या सावधान करने का बोध होता है। इसका सम्बन्ध न तो क्रिया से होता है और न ही किसी अन्य शब्द से। यह वाक्य से अलग रहता है और इसका कोई विशेष कारक चिन्ह भी नहीं होता है। सम्बोधन कारक के उदाहरण -

  • खबरदार !
  • रीना को मत मारो।
  • रमा ! देखो कैसा सुन्दर दृश्य है।
  • लड़के! जरा इधर आ।
कर्म और सम्प्रदान कारक में अंतर
  • इन दोनों कारक में ‘को’ विभक्ति का प्रयोग होता है।
  • कर्म कारक में क्रिया के प्रभाव का फल कर्म पर पड़ता है, जबकि सम्प्रदान कारक में देने या उपकार के भाव में 'को' का प्रयोग होता है। जैसे -
  1. विकास ने सोहन को आम खिलाया।
  2. मोहन ने साँप को मारा।
  3. राजू ने रोगी को दवाई दी।
  4. स्वास्थ्य के लिए सूर्य को नमस्कार करो।
करण और अपादान कारक में अंतर

करण और अपादान दोनों ही कारकों में 'से' का प्रयोग होता है, लेकिन इनके अर्थ में अंतर होता है। करण कारक में 'से' का प्रयोग साधन के लिए होता है, जबकि अपादान कारक में यह अलग होने के लिए होता है। कर्ता कार्य करने के लिए जिस साधन का उपयोग करता है, उसे करण कारक कहते हैं। वहीं, अपादान में अलगाव या दूर जाने का भाव होता है।

जैसे –
  • मैं कलम से लिखता हूँ।
  • जेब से सिक्का गिरा।
  • बालक गेंद से खेल रहे हैं।
  • सुनीता घोड़े से गिर पड़ी।
  • गंगा हिमालय से निकलती है।
विभक्तियों का प्रयोग
  • विभक्तियां आत्मनिर्भर होती हैं और उनका अस्तित्व भी स्वतंत्र होता है। ये सहायक शब्द होते हैं जो किसी वाक्य के साथ मिलकर उसे एक अर्थ प्रदान करते हैं, जैसे 'ने', 'से' आदि।
  • हिंदी में विभक्तियां विशेष रूप से सर्वनामों के साथ प्रयोग होकर जटिलता उत्पन्न करती हैं और उनसे जुड़ जाती हैं। जैसे मेरा, हमारा, उसे, उन्हें आदि।
  • विभक्तियों का प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम के साथ किया जाता है। जैसे - मोहन के घर से यह सामान आया है।
विभिन्न भाषाओं में कारकों की संख्या
भाषा कारकों की संख्या
हंगेरियन 29
फिनिश 15
बास्क 1000
असमिया 8
चेचन 8
संस्कृत 8
क्रोएशियन 7
पोलिश 7
यूक्रेनी 7
लैटिन 6
स्लोवाकी 6
रूसी 6
बेलारूसी 7
ग्रीक 5
रोमानियन 5
आधुनिक ग्रीक 4
बुल्गारियन 4
जर्मन 4
अंग्रेजी 3
अरबी 3
नार्वेजी 2
प्राकृत 6

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