वार्मअप क्यों जरूरी है
वार्मअप से आपके शरीर का तापमान और हृदय की धड़कन धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जिससे आपकी मांसपेशियाँ खुल जाती हैं। इससे आप हैवी वर्कआउट के लिए तैयार हो जाते हैं। तेजी से किया गया वार्मअप आपके स्टेमिना को बढ़ाने में भी मदद करता है। इससे आप हर एक्सरसाइज से मैक्सिमम लाभ उठा पाते हैं।
सही तरीके से किया गया वार्मअप, आपको वर्कआउट के लिए मानसिक रूप से तैयार करता है। इसके साथ ही यह न्यूरो-मस्कुलर सिस्टम को सक्रिय करता है। अगर आप भी किसी तरह की चोट या चोट के घात से बचना चाहते हैं, तो वर्कआउट शुरू करने से पहले वार्मअप जरूर करें।
वार्मअप का काम फ्लैग्जिबिलिटी लाना नहीं है
अधिकांश लोगों के मानने के अनुसार, वार्मअप से शरीर में फ्लैक्सिबिलिटी आती है। हर व्यक्ति की वर्कआउट के आधार पर अलग-अलग फ्लैक्सिबिलिटी हो सकती है। यानी किसी भी कार्य को करने के लिए उसके अनुसार ही फ्लैक्सिबिलिटी की आवश्यकता होती है।
जिम में फ्लैग्जिबिलिटी का मतलब है किसी भी वर्कआउट को पूरी रेंज ऑफ मोशन के साथ करने की क्षमता। यदि जिम में आपकी बॉडी की फ्लैग्जिबिलिटी ज्यादा होती है, तो आपके शरीर में कमजोरी आने की संभावना हो सकती है।
वार्मअप का काम
वार्मअप शरीर के तापमान को उच्च करके परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के साथ-साथ इंजरी के जोखिम को भी कम करता है।
बॉडी के तापमान में वृद्धि से मसल्स में ब्लड फ्लो और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है। इससे न्यूरोमस्कुलर संवेदनशीलता और शक्ति भी बढ़ती है। इसके प्रभाव से आप हैवी वेट्स उठा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, शरीर के तापमान बढ़ने से जोड़ों और कनेक्टिव टिश्यूज को भी ट्रेन किया जाता है।
स्टेटिक Vs डायनामिक स्ट्रेच
स्टेटिक स्ट्रेचिंग में आप हर मूवमेंट को 5-60 सेकेंड तक रोकते हैं। वहीं, डायनेमिक स्ट्रेचिंग में जल्दी-जल्दी मूव करना होता है। बहुत से लोगों को वार्मअप के बारे में भी कन्फ्यूजन रहता है।
स्टेटिक और डायनामिक स्ट्रेचिंग के बाद चोट की संभावना कम हो जाती है, लेकिन स्टेटिक स्ट्रेच में खिंचाव बढ़ जाता है। स्टेटिक स्ट्रेच ट्रेनिंग से पहले मसल्स को रिलेक्स करता है और परफॉर्मेंस में कमी आ सकती है। इसलिए, एक्सपर्ट के मुताबिक डायनामिक स्ट्रेच करके ही बॉडी वार्मअप करना सही है।
इस तरह करें वॉर्म अप
वार्मअप को लो इंटेंसिटी के साथ किया जाना चाहिए। अगर आप इसमें अधिक एनर्जी लगाते हैं, तो वर्कआउट के लिए आपके पास एनर्जी काफी कम रहेगी। इसलिए जिस बॉडी पार्ट की एक्सरसाइज करने का प्लान है, उस हिस्से के लिए ही वार्मअप करें।
यदि आप चेस्ट, शोल्डर या अपर बॉडी पार्ट की एक्सरसाइज करने का प्लान बना रहे हैं, तो अपर बॉडी का ही वार्मअप करना उचित होगा।
वार्मअप के लिए क्या करें
सामान्यतः 10-15 मिनट का वार्मअप पर्याप्त माना जाता है। सर्दियों में आप इसे 20 मिनट तक बढ़ा सकते हैं। वार्मअप के लिए स्किपिंग, जंपिंग जैक या कार्डियोवस्कुलर मूवमेंट करें। इससे आपकी हार्ट बीट तेज होगी और बॉडी भी जल्दी गर्म होगी।
फोम रोलिंग करके भी मसल्स को गर्मा सकते हैं। फोम रोलर टिश्यूज के फ्लूइड कॉम्पोनेंट को इकट्ठा करता है और मसल्स को सक्रिय करता है। इस तकनीक में, जो मसल्स ज्यादा तनावयुक्त हों, उन्हें 5-10 मिनट रोल करने से आपकी मसल्स सक्रिय हो जाएँगी। फोम रोलिंग क्या है, कैसे करते हैं, सही तरीका, फायदे, प्रकार और सावधानी के बारे में जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।
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