मानसिक स्वास्थ्य
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सभी के लिए महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा है लेकिन उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब है, तो उसके जीवन में बहुत सारी समस्याएं होंगी। मानसिक स्वास्थ्य एक व्यक्ति को अपनी क्षमताओं को जानने, तनाव से निपटने का आत्मविश्वास रखने और अपने समुदाय के विकास में योगदान करने की अनुमति देता है। मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार, निर्णय, व्यायाम, नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार और कई अन्य चीजों को प्रभावित कर सकते हैं। मानसिक बीमारी के कारण व्यक्ति को बहुत सी कठिन परिस्थितियों में भाग लेना पड़ता है, जैसे बेरोजगारी, बिखरा हुआ परिवार, गरीबी, नशीली दवाओं का सेवन और अपराध। यदि किसी व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होगा तो उसका जीवन भी अच्छा रहेगा। इसलिए हम आपको इस खंड में मानसिक विकारों के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकें। लेकिन पहले हमें मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातों को समझने की जरूरत है।
मानसिक बीमारियों के कारण :-
स्वास्थ्य में आपकी भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक भलाई शामिल है। यह आपकी उम्र के साथ बदल सकता है, और आपके विचारों, भावनाओं और कार्यों जैसे विभिन्न कारकों से प्रभावित हो सकता है। यदि आप मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव करते हैं, तो डॉक्टर से मदद लेना और उपचार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। ऐसे कई अन्य कारक हैं जो आपकी आयु, आनुवंशिकी और जीवन के अनुभवों सहित मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में योगदान कर सकते हैं। जिनमे शामिल है
- -एक लंबी बीमारी के उपचार के बाद (treatment with a chronic disease)
- -नकारात्मक विचारों के बढ़ने के कारण (Negative thoughts)
- -तनावपूर्ण घटनाएं जैसे किसी प्रियजन को खोने के कारण (Stressful events of life)
- -बचपन का आघात लगने के कारण (Childhood trauma)
- -जीवन के अनुभव, जैसे आघात या तकलीफ (Life experiences, such as trauma or abuse)
- -मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का पारिवारिक इतिहास (Family history of mental health problems)
- -जीवन में अवसाद रूपी वातावरण के कारण (Depressive Environment)
- -जैविक कारक (Biological factors), जैसे कि जीन या मस्तिष्क रसायन
मानसिक बीमारी के लक्षण:-
मानसिक बीमारियों के अलग-अलग लक्षण होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेतों में आपको मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से मदद की आवश्यकता हो सकती है। जैसे कि-
- -ज्यादा चिंता करना (excessive anxieties)
- -व्यक्तित्व परिवर्तन (marked personality change)
- -ज्यादा गुस्सा करना या हिंसक व्यवहार करना (excessive anger or violent behavior)
- -बहुत ज्यादा मूड स्विंग्स होना (extreme mood swings)
- -शराब या ड्रग्स का दुरुपयोग (abuse of alcohol or drugs)
- -समस्याओं और दैनिक गतिविधियों को करने में असमर्थता (inability to cope with problems and daily activities)
- -खाने या सोने के पैटर्न में बदलाव (changes in eating or sleeping patterns)
- - व्यक्तित्व परिवर्तन (marked personality change)
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां:-
1. एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders)
एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorders) मानसिक बीमारी का सबसे आम प्रकार है। इन स्थितियों वाले लोगों में गंभीर भय या चिंता होती है, जो कुछ वस्तुओं या स्थितियों से संबंधित होती है। एंग्जायटी डिसऑर्डर के प्रकार (Types of Anxiety Disorders) भी हैं, जैसे कि
a. सामान्यीकृत चिंता विकार (Generalized anxiety disorder)
सामान्यीकृत चिंता विकार में लगातार और अत्यधिक चिंता शामिल होती है जो दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करती है। यह चल रही चिंता और तनाव शारीरिक लक्षणों के साथ हो सकता है, जैसे कि बेचैनी, किनारे पर महसूस करना या आसानी से थकावट, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, मांसपेशियों में तनाव या नींद की समस्या।
b. घबराहट की समस्या (Panic Disorder)
पैनिक डिसऑर्डर का मुख्य लक्षण बार-बार होने वाले पैनिक अटैक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक संकट का एक जबरदस्त संयोजन है। इसके कई लक्षण हैं जैसे कि
- -तेज दिल की धड़कन
- -पसीना आना
- -थरथर कांपना या हिलाना
- -सांस की तकलीफ महसूस करना
- -छाती में दर्द
- -चक्कर आना, हल्का-फुल्का या बेहोश होना
- -घुटन का अहसास
- -स्तब्ध हो जाना या झुनझुनी
- -ठंड लगना
- -मतली या पेट में दर्द
- -मरने का डर
c. फोबिया (Phobias)
फोबिया एक विशिष्ट वस्तु, स्थिति या गतिविधि का अत्यधिक और लगातार भय है जो आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है। मरीजों को पता है कि उनका डर अत्यधिक है, लेकिन वे इसे दूर नहीं कर सकते।
d. भीड़ से डर लगना (Agoraphobia)
एगोराफोबिया उन स्थितियों में होने का डर है जहां से बचना मुश्किल या शर्मनाक हो सकता है। ये डर वास्तविक स्थिति बहुत परेशान करता है और कामकाज में समस्याएं पैदा करता है। एग्रोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति इस डर का अनुभव कई स्थितियों में करता है। जैसे कि
- -सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना
- -खुले स्थानों में होने पर
- -भीड़ वाले स्थानों में होना
- -लाइन में खड़ा होने पर
- -घर के बाहर अकेले रहने पर
e. सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Disorder)
सामाजिक चिंता विकार वाले व्यक्ति को शर्मिंदगी, अपमानित, अस्वीकार किए जाने या सामाजिक संबंधों में कमी देखने के बारे में ज्यादा चिंता और असुविधा होती है। इस विकार वाले लोग स्थिति से बचने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर जानें, बोलने, नए लोगों से मिलने और सार्वजनिक रूप से खाने पीने से अत्यधिक डरते हैं।
f. अलगाव की चिंता (Separation Anxiety Disorder)
अलगाव चिंता विकार वाले लोगों को अपने लोगों से बिछड़ने का डर रहता है। ऐसे लोग घर से बाहर जाने या उस व्यक्ति के बिना बाहर जाने से इनकार कर सकते है, या अलगाव के बारे में बुरे सपने का अनुभव कर सकते हैं। ये परेशानी बचपन में विकसित होते हैं, लेकिन लक्षण वयस्क होने के बाद भी रह सकते हैं।
2. मूड डिसऑर्डर (Mood disorders)
मूड डिसऑर्डर को भी भावात्मक विकारों या अवसादग्रस्तता विकारों के रूप में संदर्भित किया जा सकता है। इन स्थितियों वाले लोगों के मनोदशा में बहुत जल्दी बदलाव आता रहता है। इसके भी कई प्रकार होते हैं, जैसे कि
a. मेजर डिप्रेशन (Major depression)
इस अवसाद के साथ एक व्यक्ति लगातार लो फिल करता है और उसका मूड हमेशा खराब रहता है और उन गतिविधियों और घटनाओं में रुचि खो देता है जो पहले से आनंद लेते थे। वे लंबे समय तक निराश या अत्यधिक उदास महसूस करता है।
b. बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar disorder)
बाइपोलर डिसऑर्डर या द्विध्रुवी विकार वाला व्यक्ति अपने मनोदशा, ऊर्जा के स्तर, गतिविधि के स्तर और दैनिक जीवन को जारी रखने की क्षमता में असामान्य परिवर्तन का अनुभव करता है। अच्छा महसूस करने पर वो बहुत ज्यादा एनर्जेटिक हो जाते हैं, जबकि लो मूड होने पर अवसाद में चले जाते हैं।
c. मौसमी भावात्मक विकार (Seasonal affective disorder)
सर्दियों और शुरुआती वसंत महीनों के दौरान जब दिन का छोटा होता है या ज्यादा अंधेरा होता है, तो ये कुछ लोगों को डिप्रेशन में डाल सकता है। ऐसे लोगों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है एक बेहतर लाइटिंग या सूर्य की रोशनी वाले कमर में रहना।
3. सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia disorders)
सिजोफ्रेनिया एक या कई मानसिक बीमारियों का एक समूह है जिसे समझना काफी मुश्किल है। सिजोफ्रेनिया के लक्षण आमतौर पर 16 से 30 साल की उम्र के बीच विकसित होते हैं। ऐसे व्यक्ति के विचार कई बार टूटे हुए और खोए हुए से होते हैं। ये लोग उन चीजों को भी अपने आस पास महसूस करते हैं, जो कि सच में दुनिया में है ही नहीं। सिजोफ्रेनिया के नकारात्मक और सकारात्मक लक्षण हैं। सकारात्मक लक्षणों में भ्रम, विचार विकार और मतिभ्रम शामिल हैं। नकारात्मक लक्षणों में प्रेरणा की कमी और खराब मनोदशा शामिल हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उपाय
- -दूसरों से जुड़े रहें और अपने आप को अलग न समझें।
- -पॉजिटिव सोचें
- -शारीरिक रूप से सक्रिय रहें।
- -दूसरों की मदद करते रहें।
- -पर्याप्त नींद लें और समय पर सोएं और समय से जागें
- -हेल्दी डाइट लें खास कर मूड को बेहतर बनाने वाली चीजों को खाएं।
- -शराब, धूम्रपान और ड्रग्स से बचें।
- -खूब धूप लें।
- -तनाव ज्यादा न लें।
- -बहुत ज्यादा सोचना बंद करें।
- -एक्सरसाइज और योग करें।
- -ऐसा कुछ करें जिससे आपका मन लगा रहे और आप खुश रहें।
- -मिलनसार बनें।
कमेंट्स