आँख आने के कारण : लक्षण और घरेलू इलाज

आँख आने के कारण : लक्षण और घरेलू इलाज

आँख आने के कारण, लक्षण और घरेलू इलाज

आंख शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होती है। इसलिए, इसकी देखभाल बेहद आवश्यक होती है। अक्सर इन आंखों में संक्रमण या सूजन की समस्या हो जाती है, जिसे आम भाषा में आँख आना कहते हैं। इसे कंजंक्टिवाइटिस या पिंक आई के नाम से भी जाना जाता है। हम इस लेख में इस विषय पर विस्तृत जानकारी लेकर आएं हैं। यहां हम आसान शब्दों में आँख आने के कारण, घरेलू उपचार और देखभाल के तरीके बता रहे हैं, जो आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये सभी उपाय आंखों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं, इसलिए इसे अंत तक पढ़ना अवश्य करें।

आँख आना क्या है?

कंजंक्टिवाइटिस को हिंदी में "आंख आना" या "पिंक आई" (गुलाबी आंख) कहा जाता है। यह आंखों में सूजन या कंजंक्टिवा (पारदर्शी झिल्ली जो आंख की बाहरी परत को कवर करती है) में सूजन के कारण होता है। यह एक्यूट या क्रोनिक और संक्रामक या गैर-संक्रामक हो सकता है। एक्यूट कंजंक्टिवाइटिस 3 से 4 सप्ताह तक रह सकता है (आमतौर पर केवल 1 से 2 सप्ताह)। क्रोनिक कंजंक्टिवाइटिस 4 सप्ताह से अधिक समय तक रह सकता है।

आँख आने के प्रकार

वायरल कंजंक्टिवाइटिस

आमतौर पर यह वायरस के फैलने के कारण होता है और इसमें आंखों से पानी निकलता है। जल्दी ही यह एक आंख से दूसरी आंख में फैल जाता है।

एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस

यह एलर्जी के कारण हो सकता है। इस दौरान आंखों से आंसू निकलने लगते हैं और खुजली होने लगती है

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस

यह सामान्य तौर पर बैक्टीरिया के कारण होता है। इस दौरान आँखों से मवाद निकलता है और यह एक आंख से दूसरी आंख को भी प्रभावित कर सकता है

आँख आने के कारण

* बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण
* एलर्जी के कारण
* जलन पैदा करने वाले पदार्थों का उपयोग
* लेंस उत्पादों या फिर आई ड्रॉप के कारण

आँख आने के लक्षण

* आंखों में खुजली, जलन और लालिमा
* आंखों में अत्यधिक आंसू
* आंखों से मवाद निकलना
* कॉन्टैक्ट लेंस से असहज महसूस करना
* पलकों का चिपकना (खासकर सुबह के समय में)

आँख आने का घरेलू इलाज

शहद

सामग्री :
* शहद – एक चौथाई चम्मच
* साफ पानी – एक कप
उपयोग करने का तरीका :
* सबसे पहले शहद को साफ पानी में अच्छी तरह मिला लें।
* इसके बाद ड्रॉपर की मदद से शहद वाले पानी की दो बूंद आंखों में डालें।
फायदा :

जब आंख आने पर घरेलू उपचार करने की बात आती है, तो शहद एक उपयुक्त विकल्प हो सकता है। यहां तक कि शोध से पता चला है कि शहद में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जो बैक्टीरिया के खिलाफ लड़ने में और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, यह आंखों की बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस से राहत दिलाने में उपयुक्त साबित हो सकता है।
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एलोवेरा

सामग्री :
* एलोवेरा (ताजा) – एक चौथाई चम्मच
* पानी – एक कप
उपयोग करने का तरीका :
* सबसे पहले एलोवेरा को पानी में अच्छी तरह से मिला लें।
* इसके बाद आई ड्रापर की मदद से एलोवेरा वाले पानी की दो बूंद आंखों में डालें।
फायदा :

आंख आने का इलाज एलोवेरा से भी किया जा सकता है। जैसा कि पहले बताया गया था कि आंख आने का एक कारण बैक्टीरिया भी हो सकता है। एक शोध के अनुसार, एलोवेरा में एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया के साथ लड़ने में मदद कर सकते हैं। यह शोध जानवरों पर किया गया था, लेकिन ऐलोवेरा के उपयोग से पिंक आई से राहत प्राप्त करने के लिए भी संभव हो सकता है। तो अभी और अध्ययन करके यह जानने की जरूरत है कि इंसानों पर इसका कितना प्रभावी हो सकता है।
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टी बैग

सामग्री :
* टी बैग – एक
उपयोग करने का तरीका :
* टी बैग को पानी में उबाल लें।क
* इसके बाद इसे ठंडा होने के लिए रख दें।
* जब यह ठंडा हो जाए, तो आंखों पर लगभग दस मिनट के लिए रखें।
* आराम मिलने तक इस उपाय को रोजाना किया जा सकता है।
फायदा :

एनसीबीआई (राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, ब्लैक टी और ग्रीन टी में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण हो सकते हैं, जो सूजन की समस्या में आराम प्रदान कर सकते हैं। इसका मतलब है कि ये टी प्रकृति में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेट्री तत्वों से भरपूर हो सकते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, एक और शोध में बताया गया है कि चाय का उपयोग आंख आने के इलाज में भी किया जा सकता है।
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धनिया

सामग्री :
* धनिया के पत्ते (आवश्यकतानुसार)
उपयोग करने का तरीका :
* सबसे पहले धनिया के पत्तों को पानी में उबाल लें।
* अब इसे ठंडा कर इससे आँखों को धोएं।
फायदा :

धनिया को आँख आने की समस्या के घरेलू उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। एक शोध में इससे जुड़े गुणों का पता चला है, जिसमें एंटी इन्फ्लामेट्री गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं और आँख आने की समस्या में राहत प्रदान कर सकते हैं। इसी शोध में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि धनिया का उपयोग आँख आने के इलाज में संभव है।
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फिटकरी

सामग्री :
* फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा
उपयोग करने का तरीका :
* सबसे पहले थोड़ी देर के लिए फिटकरी को पानी में डाल दें।
* फिर फिटकरी को निकालकर पानी को किसी आई ड्रॉप बॉटल में भर लें।
* फिर फिटकरी वाले पानी की दो बूंद आंखों में डालें।
* राहत मिलने तक इसे रोजाना दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
फायदा :

आँख आने की समस्या पर घरेलू उपचार के तौर पर फिटकरी का भी उपयोग किया जा सकता है। एक शोध के अनुसार, फिटकरी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद कर सकते हैं। इसी शोध में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि फिटकरी आँख आने की समस्या के इलाज में सहायक साबित हो सकती है।

आँख आने पर डॉक्टर की सलाह कब लेनी चाहिए

* अगर आंख आने के लक्षण 3-4 दिनों तक बने रहते हैं।
* देखने में दिक्कत का सामना करना।
* आंखों में असहनीय दर्द।
* पलकें या आंखों के आसपास की त्वचा का लाल होना या सूजन की समस्या।
* अन्य लक्षण के साथ सिरदर्द।
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आँख आने का इलाज

वायरल कंजंक्टिवाइटिस :

आमतौर पर, वायरल कंजंक्टिवाइटिस के मामले हल्के होते हैं और इस तरह के संक्रमण 7 से 14 दिनों में बिना उपचार के भी ठीक हो जाते हैं। लेकिन कुछ मामलों में इस समस्या का स्पष्ट होने में 2 से 3 सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। इसके इलाज के लिए, एंटी-वायरल दवाओं का उपयोग किया जाता है।

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस :

बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस का आमतौर पर इलाज आंख में ड्रॉप या एंटीबायोटिक मलहम के जरिए किया जा सकता है। ये एंटीबायोटिक्स संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं और इसके फैलने को रोकने में सहायक हो सकते हैं।

एलर्जी कंजंक्टिवाइटिस :

एलर्जी के कारण होने वाले कंजंक्टिवाइटिस का इलाज कुछ एंटी-एलर्जिक दवाओं और आई ड्रॉप्स से किया जा सकता है। वहीं, कुछ मामलों में डॉक्टर इसके लक्षणों को सुधारने के लिए अन्य दवाओं के उपयोग की सलाह दे सकता है।

आँख आने में क्या खाना चाहिए

* सूजन संबंधी समस्याओं में, टमाटर, पालक, केला, संतरा, चेरी, और स्ट्रॉबेरी जैसे एंटी-इंफ्लामेटरी आहार का सेवन किया जा सकता है।
* पिंक आई के समय, विटामिन-सी और ई युक्त आहार का सेवन भी किया जा सकता है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और शरीर को बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता प्रदान कर सकता है।
* विटामिन ए की कमी के कारण आंखों से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसलिए, इस समय हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, कद्दू, पपीता और आम जैसे विटामिन ए युक्त पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।

क्या न खाएं :

* रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (जैसे – सफेद ब्रेड और पेस्ट्री)
* फ्रेंच फ्राइज और अन्य तले हुए खाद्य पदार्थ।
* सोडा, चीनी या अन्य मीठे खाद्य-पदार्थ।
* रेड मीट (बर्गर या स्टेक) और प्रोसेस्ड मीट (हॉट डॉग या सॉसेज) इत्यादि।

आँख आने से बचाव

* आंखों को हमेशा साफ पानी से धोएं। * आंखों को कभी मैले हाथों से न छूएं।
* आंखों में लाली नजर आने पर उसे गंभीरता से लें और तुरंत उसे साफ पानी से धोएं
* आंखों को पोंछने के लिए साफ तौलिए का प्रयोग करें।
* आंखों के मेकअप के लिए सही उत्पाद का चयन करें। साथ ही उसकी एक्सपायरी डेट अवश्य देखें।
* आंखों या चेहरे के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों को साझा न करें।
* साफ तकिये का ही इस्तेमाल करें।

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